मंगलवार, 12 अगस्त 2025

यूट्यूब पाती

 दूसरों की कविताएं चुन जब तुम थी गाती

कहो क्या था, संदेसा या प्रेम यूट्यूब पाती


मेरे भी गीत में की थी तुम कई परिवर्तन

सुर, लय में बांध ली भाव का था आवर्तन

आज भी हूँ सुनता जिंदगी जो पीट जाती

कहो क्या था, संदेसा या प्रेम यूट्यूब पाती


सबकी तो हैं होती अपनी लक्ष्मण रेखा

जिसने उसको फांदा जीवन विभिन्न देखा

ऐसी रेखाएं तोड़ती बन गयी प्यार उन्मादी

कहो क्या था, संदेसा या प्रेम यूट्यूब पाती


प्रणय को कहा बयार तुम समझ पाई सस्ता

व्यक्तित्व मिलन दुर्लभ समझी बिखरा बस्ता

चुगते गई अविवेकी कागजी नाव भाव बहाती

कहो क्या था, संदेसा या प्रेम यूट्यूब पाती


व्हाट्सएप्प चैट वीडियो कॉलिंग अन्य हैं रास्ते

हर एप्प पर थी दिखती थी तुम दौड़ते हांफते

क्या चाह थी क्या राह थी विभिन्न तथ्य अपनाती

कहो क्या था, संदेसा या प्रेम यूट्यूब पाती।


धीरेन्द्र सिंह

13.08.2025

09.30


जुगलबंदी

 लय में बंधी रहोगी धुन में बंधी रहोगी

संगीत जीवन का दिया तुम्हारा सानिध्य

गीत रचने लगे भाव रंग-रंग के खिलें 

होता है ऐसा ही मन का मन से आतिथ्य



लय में बंधी रहोगी धुन में बंधी रहोगी

संगीत जीवन का दिया तुम्हारा सानिध्य

गीत रचने लगे भाव रंग-रंग के खिलें 

होता है ऐसा ही मन का मन से आतिथ्य


कपोलों में हंसती थी चुराती जो अंखिया

खिल मुझसे लिपट जाता था वह साहित्य

दिल की धड़कनों पर दौड़ता बोलता मन

क्या-क्या न रच गईं तुम प्यार का आदित्य


भावनाओं को शब्दों की चूनर थी चढ़ाती

यूट्यूब में गीतों का था अभिनव दृश्यव्य

यत्र-तत्र प्रकाशित होती थी गुंजन तुम्हारी

कई सुरों का बखूबी बतला थी महत्व


वह अपनी जुगलबंदी थी छाप थी अलग

किस कदर परिवेश में था तुम्हारा आधिपत्य

प्रसिद्धि न संभाल सकी चापलूस पैठ गए

हर डगर समावेश में गा पुकारा किए अनित्य।


धीरेन्द्र सिंह

12.08.2025

17.23