सोमवार, 24 जनवरी 2011

तृप्ति का बस एक गोता

भावनाएं भीरूता का अक्सर करें प्रदर्शन
कल्पनाएं विहंगमयी नभ को करे कमतर
युग्म यह निर्मित करे अभिसार का त्यौहार
कौन छूटा इससे नभतर हो या जलचर

हर बदन का अपना गगन है रंगमय
हर अमन रंगीनियों का ही रहता सहचर
तूलिकाएं कैनवास पर तलाशे रंग नया
एक नया रंग आप कब पकड़ लूं बढ़कर

तुष्टियां, संतुष्टियां करें भ्रमित दुनिया यहां
कौन कितना पूर्ण किसका हमसफर रहबर
सांत्वना, सामंजस्य का यह खूबसूरत तालमेल
एक छलावा आत्ममयी कौन पाया छूट पलभर

अनवरत एक तलाश आत्मविश्वास ना हताश
नई पहल की कामना ले कामनाओं का तरूवर
एक अभिनव सी खनक हो राग की अनुराग की
तृप्ति का बस एक गोता जीवन हो जाए सरोवर.




भावनाओं के पुष्पों से,हर मन है सिज़ता
अभिव्यक्ति की डोर पर,हर धड़कन है निज़ता,
शब्दों की अमराई में,भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई मे,एक तड़पन है निज़ता.