सोमवार, 14 जून 2021

दूजे से बतियाती है

 पहला न करे फोन जुगत यह लगाती है

पहले को ब्लॉक कर दूजे से बतियाती है


सोशल मीडिया पर साहित्य प्रेम गांव

कुछ न कुछ लिखते सब इसके छांव

लिख उन्मुक्त चाह भरमाती बुलाती है

पहले को ब्लॉक कर दूजे से बतियाती है


घर में करे सवाल तो कहें साहित्य चर्चा

पैसे लगा प्रकाशित पुस्तकों पर चर्चा

कभी मैसेंजर, कभी व्हाट्सएप चलाती है

पहले को ब्लॉक कर दूजे से बतियाती है


कर देती अनब्लॉक पहले प्रेमी से बतियाए

रिश्तेदार का कॉल था झूठ पालना झुलाए

अपने चटखिले पोस्ट उससे हाइड कर जाती है

पहले को ब्लॉक कर दूजे से बतियाती है


फिर गोष्ठियों का जुगाड से हो आयोजन

कभी चाय के आगे न खाने का आयोजन

नयन अठखेलियों में छुवन खिलखिलाती है

पहले को ब्लॉक कर दूजे से बतियाती है।


धीरेन्द्र सिंह

घातक कई नारी

 चूस लो यूं जूस लो स्वार्थी हितकारी

सम्मान के प्रलोभन में घातक कई नारी


काव्य लेखन सीखना या कि गद्य लेखन

बोलती शिक्षित हैं पर अब तक संग बेलन

इस विनम्रता पर कहां दिखे भला कटारी

सम्मान के प्रलोभन में घातक कई नारी


महिलाएं भी बन रहीं उन्मुक्त सुजान

कुछ की चाहिए शीघ्र ऊंचा एक मचान

इस लक्ष्य में कहीं विनम्रता तो सिसकारी

सम्मान के प्रलोभन में घातक कई नारी


झूठ है अबला मन की कोमलांगिनी

सत्य यह कि वह प्रचंड सिंहासिनी

वर्चस्वता में प्रखर चाह गज पर सवारी

सम्मान के प्रलोभन में घातक कई नारी


शब्द से भाव गहूं यह तो समुद्र मंथन

विष भी पिलाएं वैसे जैसे लगाएं चंदन

षोडशी सी अदाएं बच्चों की महतारी

सम्मान के प्रलोभन में घातक कई नारी।


धीरेन्द्र सिंह