सोमवार, 8 जनवरी 2024

मालदीव हो गए

 कैसे कहें वह आत्मिक सजीव हो गए

सहयोग था प्रचुर पर मालदीव हो गए


भव्यता में सम्मिलित अभिनव योगदान

अभिव्यक्तियों में फूंके मिल चेतना प्राण

विवादखिन्नता में भ्रमित परजीव हो गए

सहयोग था प्रचुर पर मालदीव हो गए


पहले था समर्पण प्राप्त करता अनुराग

लक्षदीप सा गूंजा और हो गया विवाद

झूठे गुरुर में आधार निर्जीव बो गए

सहयोग था प्रचुर पर मालदीव हो गए


उपकार और सम्मान में हो मदांध

सोचकर बढ़े है सशक्त दूजा कांध

 देखते ही देखते वह अतीत हो गए

सहयोग था प्रचुर पर मालदीव हो गए


यह था सतत प्रयास उसी राह लौट आएं

पहले की तरह उन्मुक्त होकर खिलखिलाएं

सोशल मीडिया छोड़ रिक्त नींव हो गए

सहयोग था प्रचुर पर मालदीव हो गए।


धीरेन्द्र सिंह

08.01.2024


22.34

ना मानें

 तृषित है अधर मगर रीत न्यारी

ना माने हैं वह रचित प्रीत क्यारी


यह रचना नहीं एकल सद्प्रयास

रहे दो हृदय एक-दूजे के निवास

बोया कोई काटे जबर तरकारी

ना माने हैं वह रचित प्रीत क्यारी


ना बोलें रहें चुप पूछें जो कुछ

क्या प्रणय प्रवृत्ति होता है गुपचुप

करें विरोध खाएं कसम महतारी

ना माने हैं वह रचित प्रीत क्यारी


यह तृष्णा अजब कई लोग बेसमझ

स्व में ही सरोवर पर लहर की अरज

स्वीकारना ही है क्या आत्म आरी

ना माने हैं वह रचित प्रीत क्यारी


बहकने भटकने की नव डगर है

कहो और कितनों पर रखे नजर है

वही संग हो जो उमंग प्रीतकारी

ना माने हैं वह रचित प्रीत क्यारी।



धीरेन्द्र सिंह

08.01.2024

06.31