सोमवार, 27 नवंबर 2023

चुक गए संवाद

 शब्द कितने चुक गए संवाद

फिर भी कथनी नहीं आबाद


प्यार कितने रूप में हैं बिखरे

और कितने भाव के जज्बात


शब्द भाव लगे रेत धूरी

भाव निभाव की हरकत अधूरी

कल्पनाओं की सजे नित बारात

अनुभूगियों के भी घात-प्रतिघात


भंवर सा घूमता भाव प्यार

संवर कर ढूंढता चाव धार

सीढ़ियों पर दिखता हर नात

प्यार ऊंचा हो कबकी बात


लिख रहे कुछ, जिएं प्यार

पढ़ रहे, समझ की झंकार

शब्द चुका या चुका संवाद

कथनी संग मथनी नित मुलाकात।


धीरेन्द्र सिंह

27.11.2023

21.29