रविवार, 28 जनवरी 2024

प्रणय

 जब हृदय पुष्पित हुआ

प्रणय आभासित हुआ

व्योम तक गूंज उठी

दिल आकाशित हुआ


अभिव्यक्तियों की उलझनें

भाव आशातित हुआ

प्रणय की पुकार यह

सब अप्रत्याशित हुआ


राम की सी प्राणप्रतिष्ठा

महक मर्यादित हुआ

अरुण योगीराज सा

मनमूर्ति परिचारित हुआ


हृदय उल्लसित कुसुमित

सुगंध पर आश्रित हुआ

प्रणय बिन कहे बहे


व्यक्ति बस मात्रिक हुआ।


धीरेन्द्र सिंह

29.01.2024

08.45

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