शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

सत्य-असत्य

मार्ग है प्रशस्त कदम सभी व्यस्त
मंजिल को छूने की सब में खुमारी है
सत्य और असत्य का संघर्ष चहुंओर
निर्णय ना हो पाए कैसी लाचारी है

सत्य को असत्य बनाने की कोशिशें
असत्य की विजय रथ पर सवारी है
ताम-झाम लाग-लश्कर असत्य संग
फिर भी ना कैसे सत्य लगे भारी है

एक तरफ हैं खड़े असत्य से जो लड़े
असत्य के मुकाम पर भीड़ बड़ी भारी है
वह भी इंसान हैं जो असत्य से रहे लड़
और जो इंसान हैं उनकी क्या लाचारी है

सत्य की भट्टी में लौह पिघलता है
सत्य दग्ध सूर्य है तलवार दुधारी है
असत्य में है पद,पैसा और पाजेब
असत्य किसी की अनबोल ताबेदारी है.




भावनाओं के पुष्पों से,हर मन है सिज़ता
अभिव्यक्ति की डोर पर,हर धड़कन है निज़ता,
शब्दों की अमराई में,भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई मे,एक तड़पन है निज़ता.

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूबसूरत भावाव्यक्ति

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  2. सत्य की भट्टी में लौह पिघलता है
    सत्य दग्ध सूर्य है तलवार दुधारी है
    असत्य में है पद,पैसा और पाजेब
    असत्य किसी की अनबोल ताबेदारी है.

    बहुत सुंदर भाव लिए हुये ...अच्छी प्रस्तुति

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