शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010

मुलाकात नहीं होती है

अब कहीं और कोई बात नहीं होती है
भ्रमर-फूलों में अब सौगात नहीं होती है
भावनाएं भी प्रदूषित हो रहीं उन्माद के तीरे
धड़कनों की शर्मीली मुलाकात नहीं होती है

मिले और जुड़ गए मानों पुराना रिश्ता हो
तेज जीवन में अनुराग का क्यों बस्ता हो
प्रलोभन से घिरे मन में बरसात नहीं होती है
निगाहों में छुपाए शाम मुलाकात नहीं होती है

कभी गीतों में ढलकर नई धुन बन जाएं
सांस की तारों पर शबनमों को सजाएं
दो हृदयों में अब पदचाप नहीं होती है
अब मंदिर के बहाने मुलाकात नहीं होती है

प्रौद्योगिकी में है डूब रहा कोमल स्पंदन
प्रगति, उपलब्धि में दमित मानवीय वंदन
यंत्रवत काम में दिलबात नहीं होती है
चांदनी भी ठिठके यह मुलाकात नहीं होती है.



भावनाओं के पुष्पों से,हर मन है सिज़ता
अभिव्यक्ति की डोर पर,हर धड़कन है निज़ता,
शब्दों की अमराई में,भावों की तरूणाई है
दिल की लिखी रूबाई मे,एक तड़पन है निज़ता.