बुधवार, 24 जनवरी 2024

दिल एक

 

कोई तो बताए एक से अधिक प्यार

दिल एक कैसे अनेक का अधिकार

 

पंखुड़ी की ओस में लिपट भावनाएं

सुगंध सी प्रवाहित होकर कामनाएं

पलकों से उठा चूनर करें अभिसार

दिल एक कैसे अनेक का अधिकार

 

रिश्ता तोड़ गयीं छोड़ गयीं महारानी

क्या यह उचित ढूंढें एक देवरानी

प्यार का भी अंग होता है प्रतिकार

दिल एक कैसे अनेक का अधिकार

 

माना कि बेखुदी मैं जाते हैं लट उलझ

यह एक दुर्घटना है प्यार ना सहज

दूसरों में ढूंढते एक उसी की झंकार

दिल एक कैसे अनेक का अधिकासर।

 

धीरेन्द्र सिंह

24.01.2024

22.58

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