शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

सर्जनात्मकता

 
आज छल है मन अटल है, अपने विश्वास पर
परिस्थितियों का कलकल है, बस शांत हो जायेगा
जो चपल है नित्य धवल है, राग में अनुराग में
कितना भी अनगढ़ रहे वह, तुकांत हो जाएगा

भोर की बांसुरिया हो, या गोधूलि की गुंथन
एक पहर ऐसा भी होगा, आक्रान्त हो जायेगा
सौम्यता की पहचान, आसानी से कब हो पायी
प्रखरता जब आएगी, तो वृत्तांत हो जाएगा

कौन बदला है, किसी परिवर्तन की राह पर
स्वयं को जिसने भी बदला, संभ्रांत हो जाएगा
और अनुकरणीय बनेगा, कर्म से सिद्धांत से
देख उसको छल-कपट, खुद क्लांत हो जाएगा

सर्जनात्मकता हमेशा, परिवर्तन की चाह करे
सर्जक वही बने, जो दिव्यांत हो जाएगा
अपनी धुन में, एक आराधना का धुन लिए
सिल पर रसरी रगड़ते, सुखान्त हो जाएगा.


भावनाओं के पुष्पों से,हर मन है सिज़ता
अभिव्यक्ति की डोर पर,हर धड़कन है निज़ता, 
शब्दों की अमराई में,भावों की तरूणाई है 
दिल की लिखी रूबाई मे,एक तड़पन है निज़ता.

6 टिप्‍पणियां:

  1. एक-एक पंक्ति बहुत ही प्रेरणादायी है । आपकी रचना आपके निर्मल मन का दर्पण जैसी है । बहुत सुखद लगा इस inspirational कविता कों पढना ।

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  2. आपकी रचना बहुत ही उच्चकोटि की है ... बहुत अच्छा लगा पढकर ...

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  3. बहुत अच्छी रचना ...परिवर्तन हमेशा होता है और उसके अनुरूप खुद में भी परिवर्तन करना ज़रूरी है ..

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  4. परिवर्तन भी जरुरी है और अगर सही समय पर किया जाए तो सृजनात्मकता की ओर ले जाता है

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