कर्म अब धर्म, अर्थ, भाषा आधारित
कर्म का फल प्रश्नांकित है, विचारित
सत्कर्म है संबंधित समाज, देश नियम
कर्म व्यक्तिजनित हतप्रभ अधिनियम
पाप-पुण्य समायाधीन जग में संचारित
कर्म का फल प्रश्नांकित है, विचारित
जैसा कर्म वैसा फल प्रबुद्ध समाज का
भ्रष्टाचार जहां वहां परिणाम गजब का
मानवता सृजित निरंतर विकास पगधारित
कर्म का फल प्रश्नांकित है, विचारित
कलयुग का नाम ले कर्मधर्म कहें कंपन
मानवयुग उलझन में हो कहां समंजन
सब चले राह चले बांह छाहँ ना निर्धारित
कर्म का फल प्रश्नांकित है, विचारित।
धीरेन्द्र सिंह
29.08.2025
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