तथ्य मैला हो रहा है
सत्य बना है अनुभागी
कथ्य की सीमाएं निर्धारित
जीवन लगता बैरागी
न्यायालय की ओर बढ़ें
अधिवक्ता हैं विधि रागी
भोर चाँद उदय प्रमाणित
सूर्य रात्रि गति साधी
प्रजातंत्र का मंत्र लगे टूटा
जनतंत्र बन रहा खुराफाती
भ्रष्टाचार आचार बन रहा
जमुना हों या जुमेराती
कौन रचा ऐसा समाज
जहां देखें वहां प्रतिवादी
अन्तरघर्षण बना आकर्षण
बिन दूल्हे के बाराती।
धीरेन्द्र सिंह
06.06.2026
07.05


