भटक रही नव पीढ़ी नए विचारों का ले अम्बार
उक्तियों की सूक्तियाँ हैं पथप्रदर्शक अपरम्पार
सुधारना, संवारना नया प्रचलित यह कारोबार
प्रतिभा स्वयं निखरती पथप्रदर्शक कहें संवार
पिछली पीढ़ी सोचती नव पीढ़ी बुद्धू गंवार
उक्तियों की सूक्तियाँ हैं पथप्रदर्शक अपरम्पार
"मोटिवेशनल स्पीकर" उभरती चतुर प्रक्रिया
वेद-शास्त्र, धर्मग्रंथ की नए शब्दों की क्रिया
नई पीढ़ी की उन्मुक्तता को कहें लगाएं कतार
उक्तियों की सूक्तियाँ हैं पथप्रदर्शक अपरम्पार
हर बीज का अपना विकास निजी है पल्लवन
खाद-पानी-धूप मिले यथेष्ट खुला रहे उपवन
प्रतिभा होती विकसित नव चेतना की हुंकार
उक्तियों की सूक्तियाँ हैं पथप्रदर्शक अपरम्पार।
धीरेन्द्र सिंह
02.07.2026
06.32