मंगलवार, 29 सितंबर 2026

आप उपवन

आपने कुछ शब्द लिखा भींग गया मन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन



अंदाज आपका कैसे सबसे अलग है लगता
पर्वत से जैसे मद्धम गति बहता हुआ झरना
आप कौन हैं क्या हैं कैसे झंकृत मन आंगन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन

लिखते ही रहतीं आप पोस्ट करते रहती हैं
जंगल में जैसे उन्मुक्त हवा बहते रहती है
भाव झोंके आपके रंग सुंदर करें हैं चमन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन

इस उपवन में मनभाव को मिलता विश्रांति
आप लगन भाव की अधरों की मधुर कांति
एक खयाल आप मेरी कल्पना की दहन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन।

धीरेन्द्र सिंह
30.09.2026
07.22

रविवार, 27 सितंबर 2026

एक तिनका

जलधारा, जीवनधारा
प्रकृति जीव आधारा
संगृहित भाव जगे
सुदूर से कोई पुकारा






भावनाओं की सरणी
कामनाएं जल सकारा
किसका वेग प्रबल है
तट किनारे प्रवाह ललकारा

हे नदी तू सखी
हम दोनों की धारा
दोनों प्रवाहित युगों सदी
मनुष्यता को है संवारा

आज मन विचलित लगे
प्रणय ने है हुंकारा
एक तिनका उनके मन का
सहेज मुझे दे जलधारा।

धीरेन्द्र सिंह
28.09.2026
10.10

उम्र का ढक्कन

प्रणय की लौ पर उम्र का ढक्कन लगा है
हृदय ब्रेड सा जला ढेर सा मक्खन लगा है



लौ न बुझती उम्र दहकता बहकता बेचैन
पौ न फटती प्रीत की उमड़ते घुमड़ते नैन
कौन बांधा प्रीत सरणी सांस में यौवन बंधा है
हृदय ब्रेड सा जला ढेर सा मक्खन लगा है

कह रहे उम्र बड़ी पूजा-पाठ भजन की घड़ी
चेतनाएं चुलबुली हो चाहती लगन की अड़ी
प्यार में ईश्वर नहीं क्या भक्ति का दोहन लगा है
हृदय ब्रेड सा जला ढेर सा मक्खन लगा है

अंकल आंटी, दादा-दादी सुदूर की जैसे घाटी
जीवन हलचल मुक्त हुए सन्यास की है परिपाटी
हृदय उम्र से दूर लपक-लचक धुन अगन मचा है
हृदय ब्रेड सा जला ढेर सा मक्खन लगा है।

धीरेन्द्र सिंह
28.09.2026
07.02

शनिवार, 26 सितंबर 2026

कौन किससे

कौन किससे निबद्ध है कहाँ कैसे आबद्ध है
यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है



यह मुझे सहयोग दे वह पूर्ण अपना समर्थन

सुविधा लाभ मिला करे होता रहे आवर्तन

आदर्श, सिद्धांत, नैतिकता लगता स्तब्ध है

यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है


अधिकांश पढ़ते रहते अपने धर्म की पुस्तक

सारांश तक झलके नहीं कामनाओं की दस्तक

धर्म भाव सब एक कहें इसपर चर्चा निःशब्द है

यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है


विपक्ष, विरोध हंगामे का प्रयोग सब उपद्रव

भौतिकता की चमक-दमक फिर भी पराभव

अंतर्मन की ज्योति बुझ रही गुट लयबद्ध है

यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है।


धीरेन्द्र सिंह

27.09.2026

08.25

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

मनुष्य

रोपता नहीं हूँ बल्कि छींटता हूँ
ढकेलता नहीं बल्कि खींचता हूँ
पल्लवन संभावना जहां भी दिखे
मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ






मनुष्य हूँ प्रबुद्ध हूँ संयुक्त हूँ

आत्मा अजर अमर से युक्त हूँ

चुनौतियां मिले आंख न मींचता हूँ

मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ


प्यार ले शुमार हूँ एक खुमार हूँ

व्यक्ति-व्यक्ति गढ़ सकूं कुम्हार हूँ

मनुष्यता का ना कोई रिक्तता हूँ

मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ


व्यक्ति का अस्तित्व हूँ नियुक्ति हूँ

मनुष्य हूँ मानवता की आसक्ति हूँ

मैं, तुम, यह, वह विलग कर उन्मुक्तता हूँ

मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ।


धीरेन्द्र सिंह

26.09.2026

08.18
 

गुरुवार, 24 सितंबर 2026

कौन छूटा

कौन टूटा, कौन रूठा जग की यह बात है
कौन छूटा, कौन ठूँठा हद तोड़ने की बात है



साथ चलता कौन है यह लोकप्रिय भ्रम है
भीड़ हो या नाते-रिश्ते पसरे बहुत वहम हैं
कौन  छूछा, कौन भूखा सदियों के हालात हैं
कौन छूटा, कौन ठूँठा हद तोड़ने की बात है

चल रहे अकेले अनुभूति कहे सब साथ हैं
लक्ष्य भिन्न-भिन्न हैं लगे एकलाक्षीय बारात है
कौन लूटा, कौन झूठा जग में यही चर्चा नाद है
कौन छूटा, कौन ठूँठा हद तोड़ने की बात है

विश्व यह माया है सबसे झूठी यह काया है
स्वार्थ जहां थम गया ठौर वही मन भाया है
कौन अनूठा, कौन अटूटा चलता यही विवाद है
कौन छूटा, कौन ठूँठा हद तोड़ने की बात है।

धीरेन्द्र सिंह
25.09.2026
05.30

बुधवार, 23 सितंबर 2026

यह कैसे रचनाकार

 समूह में
जब कभी भी
पढ़ता हूँ
प्रकाशित पुस्तक की
कोई रचना 
या कोई अंश
दया आती है रचनाकार पर
शेष नहीं रहा लेखन अंश,











बुरा लग गया ?
क्यों रचनाकार जी
समूह क्या 
शीत भंडार गृह है
जहां वर्षों पहले रचित को
भंडारण के लिए डाला जाता है
या कि रचनाकार जी
नया मौलिक लेखन से भी नाता है ?












रचनाकार हैं, कल्पनाशील हैं
फिर अपनी रचना का
बने क्यों वकील हैं ?
चिपका देते हैं पुरानी रचना
समूह का उद्देश्य नहीं सामान्य
रचे विगत साहित्य का ढकना,
क्या चूक गए हो रचनाकार
भूतकाल की रचना विज्ञापन
करतेअनचीन्ही झंकार,













समूह में
जब कभी भी
पढ़ता हूँ पूर्व प्रकाशित रचना
रचनाकार का प्रचार-प्रसार लगे
जिसकी सूख गई है कल्पना
बीते कल लिए आज में सजना।









धीरेन्द्र सिंह

23.09.2026

13.21
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