रविवार, 20 सितंबर 2026
लौटा दिया
मुझे ना बुलाती मुझे ना सुनाती
शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
ऑनलाइन प्यार
भावनाएं उभरती हैं अभिव्यक्तियां अपरम्पार
श्रृंगार बरसता है जब हो जाता ऑनलाइन प्यार
गुण कोई होता है कर लेता सहज आकर्षित
हर भाव, सुगम भाव चाहने को रहता व्यथित
मिल जाता कोई अनुकूल, उठता भाव गुबार
श्रृंगार बरसता है जब हो जाता ऑनलाइन प्यार
मोबाइल के स्क्रीन पर हर बात लगे रसभीनी
शब्दों के फुहार में मिले सुगंध प्रीति नव चिन्ही
हृदय धड़कता विनय से कहता मीठा लगे दुलार
श्रृंगार बरसता है जब हो जाता ऑनलाइन प्यार
जब चाहें तब चाह उकेरे दिन हो या रात, सबेरे
अभिलाषाएं अनंत हैं क्यों बंदिश में खुद को घेरें
दूरी चाहे कितनी हो मजबूरी का ना रहे बुखार
श्रृंगार बरसता है जब हो जाता ऑनलाइन प्यार।
धीरेन्द्र सिंह
गुरुवार, 17 सितंबर 2026
अपनी छांव
हर व्यक्ति अपनी छांव का गांव है
जहां आसक्ति अभिव्यक्ति का निभाव है
मन की भूमि पर कई नई उगती फसलें
कामनाओं की मंडियों में भाव हैं उजले
बेचने-खरीदने का ही सबका स्वभाव है
जहां आसक्ति अभिव्यक्ति का निभाव है
मस्तिष्क के ट्रैक्टर से काम सब हो रहा
भावना की बदलियों से सब सिंचित हो रहा
समाज की विविधताओं का दबाव है
जहां आसक्ति अभिव्यक्ति का निभाव है
भीड़ की आदत है पर स्वभाव चाह अकेला
स्वयं की तलाश में जीवन का है कई खेला
बढ़ सका व्यक्ति शक्ति उसके ही पांव हैं
जहां आसक्ति अभिव्यक्ति का निभाव है।
धीरेन्द्र सिंह
18.09.2026
07.19
बुधवार, 16 सितंबर 2026
सेवानिवृत्ति
तट पर बैठे सोचें क्या, बढ़िए नाव की ओर
अपनेपन से मिलना है तो चलें गांव की ओर
रविवार, 13 सितंबर 2026
हिंदी दिवस 2026
साकार है ईश्वर है या कि निराकार
हिंदी का सजता है इसीलिए दरबार
शनिवार, 12 सितंबर 2026
आगमन है
आगमन है आपका, आचमन है आपका
सत्य है उभरता फर्क सिर्फ जाप का
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
हे गणेश
हे गणेश
आप अशेष
देश क्या
पूजे विदेश
प्रथम आराध्य नमन
सृष्टि में सुलभ गमन
बुद्धि के प्रणेता
सन्मुख सदा उपस्थिति
फल देते वैसा ही
जैसी जिसकी नियति
गणपति दूर करें वहम
सुमति दृष्टि में रहे सुगम
सृष्टि में विधान है
आप में ज्ञान है
वृष्टि कई भावों की
आप में ही ध्यान है
गजानन को अर्पित सुमन
मनन मुग्धित करे नमन।
धीरेन्द्र सिंह
12.07.2026
07.47