सोमवार, 29 जून 2026

बारिश में भींग जाएं

कई समस्या है, चिंताएं हैं, क्या चिता बनाएं
या उन्हें देखते, सोचते बारिश में भींग जाएं

भींग जाना ही होता है उस पल को जी जाना
जी जहां ना लगे वह जीवन छल है हो जाना
सामाजिक मान्यताओं अनुरूप ढलते जाएं
या उन्हें देखते, सोचते बारिश में भींग जाएं

जीवन की आपाधापी में बस दौड़ निरंतर दौड़
अभिलाषाओं की हो समीक्षा देखा जाए तौर
किनारे-किनारे संभलते मझधार से डरते जाएं
या उन्हें देखते, सोचते बारिश में भींग जाएं

रस श्रृंगार भी झेल रहा है नव मिलावट का वार
भाव-भंगिमा, अदा अठखेलियों का कहां गुबार
देह सौंदर्य पर सतत गौर करते जीवन यूँ गवाएं
या उन्हें देखते, सोचते बारिश में भींग जाएं।

धीरेन्द्र सिंह
29.06.2026
20.30


रविवार, 28 जून 2026

मन

किसको कहां मन ढूंढ रहा सब मस्त हैं
यह चिंतन त्रुटि है कि लगे भाग्य अस्त है



विश्लेषण की क्षमता संतुलित हो संयमित
तथ्य उभरता स्पष्ट कर्म तदनुरूप नियमित
स्व से सृष्टि तक नियम पारदर्शी समस्त है
यह चिंतन त्रुटि है कि लगे भाग्य अस्त है







एक समूह के बल पर नवनिर्माण प्रक्रिया
समूह गठन के लिए सर्वहितकारी क्रिया
निजता के जाल में निज हानि जबरदस्त है
यह चिंतन त्रुटि है कि लगे भाग्य अस्त है







इसे न समझें काव्य प्रवचन की नई विधा
उस पीड़ा को समझिए जिसमें मानव बींधा
घर-परिवार अस्तव्यस्त व्यक्ति बाहर मस्त है
यह चिंतन त्रुटि है कि लगे भाग्य मस्त है।

धीरेन्द्र सिंह
29.06.2026
08.35





शनिवार, 27 जून 2026

दमक

 आप एक चमक हैं और आप एक दमक है

मेरी निजी कल्पाना की आप एक धमक है

शुक्रवार, 26 जून 2026

अर्चना

कैसे कहें उनसे अपनी निजी अभ्यर्थना
शब्द रहित, दग्ध रहित उनकी शक्ति अर्चना



हृदय के स्पंदनों को छूकर हवा से बह गए


आप भी समझे ना समझे क्या वह कह गए
सबकी अपनी-अपनी दुनिया अपनी है सर्जना
शब्द रहित, दग्ध रहित उनकी शक्ति अर्चना

प्यार की जब बात कहें बोले ईश्वर से प्यार
संसार यह भ्रमजाल है मुक्ति इसका द्वार
मानवीय प्रणय खड़ा आत्म देह की गर्जना
शब्द रहित, दग्ध रहित उनकी शक्ति अर्चना

सत्य है कि सर्व परमऊर्जा के अंश हैं
प्रणय कहां निषेध धर्म में यह दंश है
समर्पण परमात्मा का आत्मा की ना दर्शना
शब्द रहित, दग्ध रहित उनकी शक्ति अर्चना।

धीरेन्द्र सिंह
26.06. 2026
21.51

गुरुवार, 25 जून 2026

नाते तोड़ गयी

वह मुझे छोड़ गई और नाते तोड़ गयी
यह टूटन है क्या, नहीं विश्वास होता है
जीवन है जागृत है, उसपर आश्रित है
कुछ न बोली चल दी कहीं ऐसा होता है






हृदय में हाहाकार कैसा मृदुल अत्याचार
दर्द है, दुख है पर संभावना को न्योता है
मन ने किया समर्पण दिखला दी दर्पण
कुछ न बोली चल दी ऐसा कहीं होता है

वह मेरी भोर थी और महकती साँझ थी
आंच जिंदगी पर चलाई तेज सरौता है
घाव है दर्द है हमदर्द मन पर नहीं रोता है
कुछ न बोली चल दी कहीं ऐसा होता है

उससा जग में कही मिलटी न कोई दूजी 
सूझी क्या उसको टूटन ही मात्र मौका है
जितना मुझे सँवारी उससे न बढ़ सक कभी
कुछ न बोली चल दी ऐसा कहीं होता है।

धीरेन्द्र सिंह
26.06.2026
08.06


बुधवार, 24 जून 2026

लाठी-लाठी का भेद

उन्मुक्त कामनाओं का कैसे करें उल्लेख
सामाजिक मान्यताएं सुन दर्शाती हैं खेद



अपने मन की सुनें या समाज को गुनें


उभरती हैं दबती जाती हैं आह्लादित धुनें
परिवेश ही सुन धुन निकालता मीनमेख
सामाजिक मान्यताएं सुन दर्शाती हैं खेद

जब मन उड़ता, चाहे जिस ओर है मुड़ता
मात्र उन्माद नहीं रहता बल्कि भाव गूढता
कदम आगे-पीछे होते देख अनगढ़ विभेद
सामाजिक मान्यताएं सुन दर्शाती है खेद

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, गया सिखाया
सामाजिकता के कई स्तर हैं, गया छुपाया
अर्थ आधारित है जीवन लाठी-लाठी का भेद
सामाजिक मान्यताएं सुन दर्शाती हैं खेद।

धीरेन्द्र सिंह
25.06.2026
04.23

सोमवार, 22 जून 2026

कोचिंग क्लास

कोचिंग क्लासेस एक प्रचलित शब्द
विद्यालयीन शिक्षा को करता स्तब्ध 

व्यवसाय हो गयी है भारतीय शिक्षा
याद करो लिख दो उत्तीर्ण परीक्षा
रटंत विद्या में सक्रिय कोचिंग संबंध
विद्यालयीन शिक्षा को करता स्तब्ध

लखनऊ में कोचिंग क्लास जल गया
होनहारों संग देश भविष्य तल गया
खोया जिन्होंने बच्चे क्या है यह प्रारब्ध
विद्यालयीन शिक्षा को करता स्तब्ध

सख्त निगरानी में रखे जाएं कोचिंग
आत्महत्या, झगड़े, आगजनी है निंद
श्रद्धांजलि देती यह व्यवस्था निःशब्द
विद्यालयीन शिक्षा को करता स्तब्ध।

धीरेन्द्र सिंह
23.06.2026
03.15