शनिवार, 16 मई 2026
कुछ छूट रहा
एक मुस्कराती जिंदगी, कमाल है
माटी 9
माटी 9 के प्रमुख माध
1. पंजीकरण व्यवस्थित था।
2. बैठने की व्यवस्था अच्छी थी।
3.रिकोर्डिन्द फोटोग्राफी अच्छी थी।
4. मंच के आरंभ में जिस पुरुष ने आरम्भ किया वह ठीक नहीं था। न कोई भूमिका न किसी प्रकार की पार्श्वभूमि बस बोलना वह भी तेज थोड़ी कर्कश आवाज।
5. महिला ने कवि सम्मेलन का आरंभिक चर्चा ठीक किन किंतु जल्द चली गईं। प्रभाव जो जमा सकती थी8न नहीं ह9 सका।
6. जगदंबिका पाल और कृपाशंकर सिंह नेता के इर्द-गॉर्ड भीड़ बाते8न कर रही थी और मंच पर म7शायरा चल रहा था।
7. एक भी कवि अपना प्रभाव नहीं छोड़ सका न श्रोताओं से जुड़ सका। मुशायरा के अध्यक्ष ने रामायण पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए रामायण को कहानी बतलाया जो आपत्तिजनक था।
8. सच्चिदानंद काशी पर कम और अपनी पत्नी मालविका की चर्चा अधिक किए। काशी पर दो मिनट भी नहीं बोल पाए। सच्चदानंद अपनी पुस्तक का लेख पढ़ रहे थे जो श्रोतागण में यह उत्सुकता नहीं जगा पाए कि ललक उत्पन्न हो। संस्मरण सुना रहे थे जो विषय के अनुरूप नहीं था।
9? सच्चिदानंद ने राजन-साजन मिश्र का काशी पर गीत की दो पंक्तियाँ गाये जो अच्छा प्रभाव डाला।
10. महिला ने अपने संचालन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए मालिनी अवस्थी का स्वागत किया।
11. 6.30 शाम को पुरुष संचालक ने आना ड्रेस बदल कर अच्छी वेशभूषा में हो गया। मालिनी अवस्थी का गाना चल रहा था। पुलिस के बड़े अधिकारी आ-जा रहे थे। मुख्यमंत्री के आगमन का समय हो रहा था।
12. संचालिका जो बुंदेलखंड की थीं उन्होंने संचालन का अनुपम कौशल का प्रदर्शन किया। मालिनी अवस्थी के गायन समापन के बाद मुख्य मंत्री के आगमन में लगानेवाले समय में मंच से कुछ देर तक बातें की फिर मंच से नीचे उतरकर श्रोताओं संग संवाद उनके गायन आदि की सहभागिता सम्मिलित की।
13. राजनेताओं की तथा पुलिसकर्मियों की मुख्य मंत्री की अगवानी की मुस्तैदी और व्यस्तता को देखने के बाद बाहर निकल विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर वाहन की प्रतीक्षा करने लगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री का काफिला आता दिखा और आगे एक मोटरसाइकिल संग कुल पांच कारें गुजरी। वहां मुस्तैद एक पुलिसकर्मी ने कहा कि काफिला में कम गाड़ियां हैं।
14. मुख्यमंत्री के आने के पहले रात्रि 8 बजे सभागार से बाहर निकल गया।
बुधवार, 13 मई 2026
चाह सूरज
गूंजा आपका तराना है
भोर भाव मनमाना है
मोबाइल से नहीं बातें
बस लिख गुनगुनाना है
कैसे आंख खुली तड़के
चाह का मन दीवाना है
पढ़ेंगी या ना पढ़ेंगी यह
सिवाय लिखने भरमाना है
भोर की सोच होती सच
शोर मन में अनजाना है
आज क्या कुछ अलग है
आह का जो फड़फड़ाना है
धीरेन्द्र सिंह
14.05.2026
05.01
मंगलवार, 12 मई 2026
लेखन
देश, धर्म, संस्कृति पर रचना लिखिए
एक समूह जागरूक का अनुरोध था
पढ़कर अनुरोध चिंतन उसपर किया
रामायण, श्रीमदभगवतगीता की कथा
राष्ट्र की विभिन्न परम्पराएं हैं अनमोल
जो विगत इतिहास नहीं एक दर्पण था
सत्य के तथ्य को कथ्य में पिरोया गया
धूल में अटा दर्पण रह-रह चमक व्यथा
नींव सशक्त है निर्माण नया तो कीजिए
देश, धर्म, संस्कृति सांस में है सबके मथा
राम सा चरित्र कहां कृष्ण सी कहां कूटनीति
पीढ़ी के संचित मार्गदर्शन क्या मात्र कथा
लेखन कौशल है तो कलम योद्धा बन जाईए
समाज वही जीवित वर्तमान जिसने है मथा
नए अस्त्र-शस्त्र हैं नई हैं कई युद्धनीतियाँ
शौर्य-शक्ति जीवंत मात्र संयुक्त हों सखी-सखा
मेरा लेखन एक प्रहार है नहीं कोई चित्रहार
भावनाओं का जैविक युद्ध आज से है नधा
आपके सुझाव का आदर है प्रेरणा हैं दिए
भाषा का मूल योद्धा हूँ देश, संस्कृति में रचा।
धीरेन्द्र सिंह
13.05.2026
08.18
शनिवार, 9 मई 2026
माहेरवाशी
"माहेरवाशी" कल्पना का गुणगान करूँगा
समाज भी सरकार है सम्मान करूँगा
श्रीकांत भारतीय, डॉ श्रेया भारतीय की सोच
अखिलेश चौबे, वेदिका संग 214 की फौज
नई सोच अभिनव कर्म प्रसारित जहान करूँगा
समाज भी सरकार है सम्मान करूँगा।
धीरेन्द्र सिंह
10.05.2026
10.05
