रविवार, 18 अक्टूबर 2026
दो किनारे
दो किनारे नहीं मिलते ऐसे प्यार है होता
यह कैसा प्रमाणपत्र ?
यह कैसा प्रमाणपत्र ?
प्रमाणपत्र
विद्यार्थियों को
उनकी योग्यता को
प्रमाणित कर विद्यालय द्वारा
दिया जाता है
पर
कुछ हिंदी समूह भी
प्रमाणपत्र बांट रहे
ना जाने किस योग्यता से
जांच रहे;
कौन हैं
ऐसे प्रमाणपत्र देनेवाले,
क्या मानक हैं ?
किसी को
कुछ नहीं मालूम
बस
प्रमाणपत्र बंट रहे नियमित,
यह और कुछ नहीं
समूह विशेष का
विपणन है
और समूह के
कुछ प्रमुख का
स्व-विज्ञापन,
व्यक्ति की
श्रेष्ठता साबित करना
हिंदी जगत का
लाइलाज रोग है,
यदि इस रुग्ण प्रथा को
बंद नहीं किया जा सकता
तो वंचित रखें
मेरी रचनाओं को
प्रमाणपत्र के अनावश्यक बोझ से,
रचना वह होती हैव
जो प्रशंसा, समीक्षा, टिप्पणी की
अभिलाषी तो है पर
किसी भी स्तर के
प्रमाणपत्र की निर्मोही है।
धीरेन्द्र सिंह
18.10.2026
19.52
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026
हौसले
खुरच-खुरच कर दीवारों को नए रंग के लिए
हौसले बढ़ते रहे फैसले की तरंग के लिए
आदतें नई संवरती हैं यदि होता है प्रजातंत्र
आए दिन मुनादी होती है मिल गया नया मंत्र
एक हंगामा कई तख्तियों का प्रबंध लिए
हौसले बढ़ते रहे फैसले की तरंग के लिए
दीवारें शक्ति हैं शौर्य है बतौर सिरमौर हैं
खुरचना प्रजातंत्र का कहें परिष्कृत तौर है
हुजूम झूमकर झंकार करे उमंग के लिए
हौसले बढ़ते रहे फैसले की तरंग के लिए
बदल देंगे चेहरा सभी दीवार के प्रकार का
भोजन में प्रमुख वही ऐसी सोच है अचार का
नई सोच नएं मुद्दे कहां ढूंढे प्रपंच के लिए
हौसले बढ़ते रहे फैसले की तरंग के लिए।
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026
शस्त्र
शोषक और शोषित
इसी से जग पोषित
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
भाषा
असहमति
अस्वीकरण नहीं होती
और सहमति
स्वीकार्यता नहीं होती
फिर इन शब्दों का
महत्व क्या
जब शब्द की मूल अभिव्यक्ति
ही बाधित हो;
शब्द अनेक हैं जो
अपने मूल अर्थ खो रहे
प्रयोगकर्ता
खिचड़ी भाषा संग सो रहे,
कौन शब्दों की खेत में
भाव की फसलों का
करेगा रखवाली ,
सब भाषा क्षेत्र में
हो रहे सुविधाभोगी;
कसमसाती भावनाओं को
उफनते शब्दों के द्वारा
कह देने की आदत,
मिश्रित शब्द अर्थ को
दे रही है जन्म,
खिचड़ी भाषा का चलन है
बोलचाल में ऐसे है
जैसे तूफानी नदी;
भाषाएं टूट रही हैं
शब्द दरक रहे हैं
अभिव्यक्तियां रुग्ण हो रहीं
और प्रयोगकर्ता
इन सबसे अनभिज्ञ
खिचड़ी भाषा में
भविष्य तलाश रहे हैं।
धीरेन्द्र सिंह
14.10.2026
07.17