जीवन सरल है सब अपनी-अपनी राहों में
क्या कुछ नहीं मिलता भाग्य की बाहों में
कर्म व्यस्त रखने का एक सुंदर छलावा है
शोषकों का तय यह शब्द छद्म बुलावा है
सच मान लिए सब जो लिखा किताबों में
क्या कुछ नहीं मिलता भाग्य की बाहों में
जीवन सरल हैं पर कुछ के लिए गरल है
जो भाग्य रचाते उनके कुकर्म धवल हैं
जीवन अनेक रूप है विभिन्न निगाहों में
क्या कुछ नहीं मिलता भाग्य की बाहों में
संयुक्त कर्म एकलाक्षीय है भाग्य निर्माता
ज्ञात हो रहा है सामूहिकता भाग्य विधाता
अकेले कर्म से व्यक्ति शोषक पनाहों में
क्या कुछ नहीं मिलता भाग्य की बाहों में।
धीरेन्द्र सिंह
04.11.2026
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