खुरच-खुरच कर दीवारों को नए रंग के लिए
हौसले बढ़ते रहे फैसले की तरंग के लिए
आदतें नई संवरती हैं यदि होता है प्रजातंत्र
आए दिन मुनादी होती है मिल गया नया मंत्र
एक हंगामा कई तख्तियों का प्रबंध लिए
हौसले बढ़ते रहे फैसले की तरंग के लिए
दीवारें शक्ति हैं शौर्य है बतौर सिरमौर हैं
खुरचना प्रजातंत्र का कहें परिष्कृत तौर है
हुजूम झूमकर झंकार करे उमंग के लिए
हौसले बढ़ते रहे फैसले की तरंग के लिए
बदल देंगे चेहरा सभी दीवार के प्रकार का
भोजन में प्रमुख वही ऐसी सोच है अचार का
नई सोच नएं मुद्दे कहां ढूंढे प्रपंच के लिए
हौसले बढ़ते रहे फैसले की तरंग के लिए।
धीरेन्द्र सिंह
17.10.2026
03.13