बुधवार, 16 सितंबर 2026

सेवानिवृत्ति

तट पर बैठे सोचें क्या, बढ़िए नाव की ओर
अपनेपन से मिलना है तो चलें गांव की ओर



कितना और निरखना मनवा जग की झांकी
अपने भीतर पैठ गए तो झलकी मिलती सांची
चलिए ढुकिए नीरवता में नहीं इतना बाधक शोर
अपनेपन से मिलना है तो चलें गांव की ओर

राजनीति यदि गांव में उसमें क्यों ही उलझना
मिल बैठ ना मिलिए संग रह चर्चा में आलोचना
शांत अबाधित परिवेश ऐसा न मिले ठौर
अपनेपन से मिलना है तो चलें गांव की ओर

पुरखे यही बसे हैं उनका है बरसता आशीष
कुलदेवी की निगरानी में मिल जाते जगदीश
अपनी भाषा अपनी संस्कृति व्यक्ति का सिरमौर
अपनेपन से मिलना है तो चलें गांव की ओर।

धीरेन्द्र सिंह
17.09.2026
09.42

रविवार, 13 सितंबर 2026

हिंदी दिवस 2026

साकार है ईश्वर है या कि निराकार
हिंदी का सजता है इसीलिए दरबार

संविधान ने हिंदी को ईश्वर बना दिया
विधि का पहना चोला सत्ता दिखा दिया
सरकारी कामकाज में हिंदी है हाहाकार
हिंदी का सजता है इसीलिए दरबार

सरकार तो कहे पर सरकारी संस्थाएं
हिंदी में पद बढ़ाएं पर न हिंदी बढ़ पाए
हिंदी की प्रगति बस हिंदी के पुरस्कार
हिंदी का सजता है इसीलिए दरबार

संघ की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित
सह-राजभाषा रूप में अंग्रेजी है स्थित
सह-राजभाषा का कामकाज में झंकार
हिंदी का सजता है इसीलिए दरबार

राजभाषा के जुझारू लोगो की जय हो
देवनागरी लिपि जीवित रहे विजय हो
गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग करे हुंकार
हिंदी का सजता है इसीलिए दरबार।

धीरेन्द्र सिंह
14.09.2026
04.46

शनिवार, 12 सितंबर 2026

आगमन है

आगमन है आपका, आचमन है आपका
सत्य है उभरता फर्क सिर्फ जाप का



सिद्धिविनायक आप, जन नायक है आप
प्रथम पूजनीय हैं जग के विनायक हैं आप
आपकी अगवानी में सर्व द्वारपट विश्वास का
आपकी कृपा रहे पूर्णता हो हर आस का

आगमन है आपका, आचमन है आपका
सत्य है उभरता फर्क सिर्फ जाप का

वक्रतुंड प्रचंड मुंड छांट देते सभी धुंध
गणेशोत्सव पर्व है गणपति बप्पा सिंधु
आस्था का हर्ष है गण-गण प्रकाश सा
गणपति वंदना हर सांस है रहा गा

आगमन है आपका, आचमन है आपका
सत्य है उभरता फर्क सिर्फ जाप का।

धीरेन्द्र सिंह
13.09.2026
06.45

शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

हे गणेश

 हे गणेश

आप अशेष

देश क्या

पूजे विदेश


प्रथम आराध्य नमन

सृष्टि में सुलभ गमन


बुद्धि के प्रणेता

सन्मुख सदा उपस्थिति

फल देते वैसा ही

जैसी जिसकी नियति


गणपति दूर करें वहम

सुमति दृष्टि में रहे सुगम


सृष्टि में विधान है

आप में ज्ञान है

वृष्टि कई भावों की

आप में ही ध्यान है


गजानन को अर्पित सुमन

मनन मुग्धित करे नमन।


धीरेन्द्र सिंह

12.07.2026

07.47

शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

मन

कब झांका व्यक्ति दिल से मन के उपवन में
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन में



सूर्य मात्र ऊर्जा नहीं दर्शाता सभी दिशा है
उपद्रव, उत्पात, उफनती सक्रिय निशा है
दिल है सब समझता पर व्यक्ति करता दमन है
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन है

मन अति विशाल गहरा मात्र झांक सकते हैं
उपवन सुगंधित रंग-बिरंगा माँज सकते हैं
इतना प्राकृतिक वैभव फिर कैसे उभरता दहन है
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन है

मन के उपवन में व्यक्ति जब उन्मुक्त घूमता
नभ की ऊंचाइयों में तब सत्य को चूमता
मन धरा-गगन मन पुलकित चंचल चितवन है
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन है।

धीरेन्द्र सिंह
05.09.2026
07.22

गुरुवार, 3 सितंबर 2026

कृष्ण

सृजन की वेदना कब समसीतोष्ण है
मनन जीवन का तप हो तो कृष्ण हैं

उकेरी भावनाओं में मौलिकता नही मिलती
संकरी कामनाएं हो तो भौतिकता कहीं मिलती
जीवन है प्रवाह जहां सब लगते तृष्ण हैं
मनन जीवन का तप हो तो कृष्ण हैं

जन्म से किए अनुभव संघर्ष और वेदना
कुछ जिए कुछ जताए जिंदगी की चेतना
जैसे देखें हैं दिखते क्या बहुरूपिया मृण हैं
मनन जीवन का तप हो तो कृष्ण हैं

आराधना संग साधना की कामना है जरूरी
भक्ति उद्भव स्वयं का नहीं कभी मजबूरी
भवसागर में बहता हर जीव मात्र तृण है
मानव जीवन का तप हो तो कृष्ण हैं।

धीरेन्द्र सिंह
04.09.2026
08.38


सोमवार, 31 अगस्त 2026

भावनाएं

आप शब्द हैं अभिव्यक्ति हैं आसक्ति हैं
स्वीकारिए या नकारिये आपकीं मर्जी
दिल भावनाओं का चितेरा है एक आम सा
बुनता है कल्पनाएं सिलता जैसे दर्जी






उम्र की उलझनें मष्तिष्क की कतरनें है बोलती
जीवन है भिन्न-भिन्न अनेक प्रकार की खुदगर्जी
जियो तो ऊष्मा सकारात्मकता है चहुँओर फैला
अन्यथा उलझनें, चुनौतियां अनुभूति की सर्दी

तर्क क्या है समाज रचित एक परिकल्पना 
मर्म क्या है निजता जड़ित एक युग्म अर्जी
व्यक्ति भावुकता को छोड़ दुनिया की सोचता
व्यक्ति है कहाँ सम्पूर्ण टुकड़ों में भाव दर्जी

सुगंध का एक चितेरा पर कहीं दूर बसेरा
जीवन का यही क्रम कहां टूटी कहीं लरजी
क्या खूब दबाया है संस्कार में जीवन भी
जब अवसर मिला चाहतें क्या खूब हैं गरजी।

धीरेन्द्र सिंह
31.08.2026
16.42