बुधवार, 3 अप्रैल 2024

फुलझड़ियाँ

 अधर स्पंदित अस्पष्ट

नयन तो हैं स्पष्ट

ताक में भावनाएं

कब लें झपट


जहां जीवंत समाज

दृष्टि छल कपट

चुहलबाजी में कहें

चाह तू टपक


इतने पर आपत्ति

व्यवहार न हो नटखट

ऐसे आदर्शवादी जो

गए कहीं भटक


अट्ठहास दिल खोल

अभिव्यक्ति लय मटक

जिंदगी की फुलझड़ियाँ

ऐसे ही चटख।



धीरेन्द्र सिंह

02.04.2024

21.32