मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

भाषा

 असहमति

अस्वीकरण नहीं होती

और सहमति

स्वीकार्यता नहीं होती

फिर इन शब्दों का

महत्व क्या

जब शब्द की मूल अभिव्यक्ति

ही बाधित हो;


शब्द अनेक हैं जो

अपने मूल अर्थ खो रहे

प्रयोगकर्ता

खिचड़ी भाषा संग सो रहे,

कौन शब्दों की खेत में

भाव की फसलों का

करेगा रखवाली ,

सब भाषा क्षेत्र में

हो रहे सुविधाभोगी;


कसमसाती भावनाओं को

उफनते शब्दों के द्वारा

कह देने की आदत,

मिश्रित शब्द अर्थ को

दे रही है जन्म,

खिचड़ी भाषा का चलन है

बोलचाल में ऐसे है

जैसे तूफानी नदी;


भाषाएं टूट रही हैं

शब्द दरक रहे हैं

अभिव्यक्तियां रुग्ण हो रहीं

और प्रयोगकर्ता

इन सबसे अनभिज्ञ

खिचड़ी भाषा में

भविष्य तलाश रहे हैं।


धीरेन्द्र सिंह

14.10.2026

07.17

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