रविवार, 1 नवंबर 2026

चलो न

चलो न प्रकृति द्वार मिल श्रृंगार करेंगे
चेतना के चमन का मिल पुकार करेंगे

एकल नहीं कुछ संभव द्वय का दरकार
युग्म ही जीवन सुगंधमय हो हर द्वार
रंगबिरंगे भावनाओं में चमत्कार करेंगे
चेतना के चमन का मिल पुकार करेंगे

एक ढर्रे पर जीवन जीने के अभ्यस्त
प्रतिदिन वही कार्य कहते सब हैं व्यस्त
निर्धारित राहों का मिल परिष्कार करेंगे
चेतना के चमन का मिल पुकार करेंगे

अनेक पक्ष अमावस्या के प्रभाव से ग्रसित
सुख-सुविधा सभी पर आत्मा कहीं ग्रसित
शुद्ध आत्मा तक पहुंचकर अभिसार करेंगे
चेतना के चमन का मिल पुकार करेंगे।

धीरेन्द्र सिंह
02.11.2026
05.03