शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
नवरात्रि
आदिशक्ति वंदना देहभक्ति अभिव्यंजना
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026
धाराएं उन्मत्त हैं
जमीन जिद कर सादगी की है बात कह रही
धाराएं उन्मत्त हैं खड़ी चुनौती दे रहीं नदी
व्योम के रंग में परिवर्तन का हो रहा प्रयास
भीड़ यह नई लग रही प्रयोजन हैं कुछ खास
दिन समीक्षक बन रही बोल कैसी रही सदी
धाराएं उन्मत्त हैं खड़ी चुनौती दे रही नदी
चप्पुओं का बहुत जोर है जल में भी शोर है
उजाले के समक्ष लौ कहे उसका अंजोर है
असमंजस में किनारा क्यों चर्चित शताब्दी
धाराएं उन्मत्त हैं खड़ी चुनौती दे रही नदी
जनभाषा बीच मुखर हो उठी वीडियो भाषा
सबकुछ ढल जाता अनुरूप जैसी हो आशा
क्या सत्य क्या असत्य मच रही है खुदबुदी
गोदौलिया
आप आकर गोदौलिया में मुझसे न मिलीं
यह एक बात या राह अदाओं की खिली
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026
यादों में
आप यादों में इस कदर तो आइए
एक चेहरे पर नजर जैसे दौड़ाइए
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026
मन
मन मोह के दर्पण का अनुरागी है
तन, मन की धुन का नियत रागी है
गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026
यश-अपयश
यश-अपयश प्रभु हाँथ सबने पढ़ा है
क्या जीबन में सब कुछ ईश गढ़ा ह
बुधवार, 30 सितंबर 2026
थपथपाहट
दर्द, कसमसाहट, छटपटाहट मिले आहट
जिंदगी ढूंढती प्यार यार की थपथपाहट
मंगलवार, 29 सितंबर 2026
आप उपवन
आपने कुछ शब्द लिखा भींग गया मन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन
रविवार, 27 सितंबर 2026
एक तिनका
जलधारा, जीवनधारा
प्रकृति जीव आधारा
संगृहित भाव जगे
सुदूर से कोई पुकारा
उम्र का ढक्कन
प्रणय की लौ पर उम्र का ढक्कन लगा है
हृदय ब्रेड सा जला ढेर सा मक्खन लगा है
शनिवार, 26 सितंबर 2026
कौन किससे
कौन किससे निबद्ध है कहाँ कैसे आबद्ध है
यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है
यह मुझे सहयोग दे वह पूर्ण अपना समर्थन
सुविधा लाभ मिला करे होता रहे आवर्तन
आदर्श, सिद्धांत, नैतिकता लगता स्तब्ध है
यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है
अधिकांश पढ़ते रहते अपने धर्म की पुस्तक
सारांश तक झलके नहीं कामनाओं की दस्तक
धर्म भाव सब एक कहें इसपर चर्चा निःशब्द है
यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है
विपक्ष, विरोध हंगामे का प्रयोग सब उपद्रव
भौतिकता की चमक-दमक फिर भी पराभव
अंतर्मन की ज्योति बुझ रही गुट लयबद्ध है
यह चतुराई का संपर्क है या व्यक्ति प्रारब्ध है।
धीरेन्द्र सिंह
27.09.2026
08.25
शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
मनुष्य
रोपता नहीं हूँ बल्कि छींटता हूँ
ढकेलता नहीं बल्कि खींचता हूँ
पल्लवन संभावना जहां भी दिखे
मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ
मनुष्य हूँ प्रबुद्ध हूँ संयुक्त हूँ
आत्मा अजर अमर से युक्त हूँ
चुनौतियां मिले आंख न मींचता हूँ
मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ
प्यार ले शुमार हूँ एक खुमार हूँ
व्यक्ति-व्यक्ति गढ़ सकूं कुम्हार हूँ
मनुष्यता का ना कोई रिक्तता हूँ
मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ
व्यक्ति का अस्तित्व हूँ नियुक्ति हूँ
मनुष्य हूँ मानवता की आसक्ति हूँ
मैं, तुम, यह, वह विलग कर उन्मुक्तता हूँ
मनोयोग से उन्मुक्त सींचता हूँ।
धीरेन्द्र सिंह
26.09.2026
08.18
गुरुवार, 24 सितंबर 2026
कौन छूटा
कौन टूटा, कौन रूठा जग की यह बात है
कौन छूटा, कौन ठूँठा हद तोड़ने की बात है
बुधवार, 23 सितंबर 2026
यह कैसे रचनाकार
समूह में
जब कभी भी
पढ़ता हूँ
प्रकाशित पुस्तक की
कोई रचना
या कोई अंश
दया आती है रचनाकार पर
शेष नहीं रहा लेखन अंश,
बुरा लग गया ?
क्यों रचनाकार जी
समूह क्या
शीत भंडार गृह है
जहां वर्षों पहले रचित को
भंडारण के लिए डाला जाता है
या कि रचनाकार जी
नया मौलिक लेखन से भी नाता है ?
रचनाकार हैं, कल्पनाशील हैं
फिर अपनी रचना का
बने क्यों वकील हैं ?
चिपका देते हैं पुरानी रचना
समूह का उद्देश्य नहीं सामान्य
रचे विगत साहित्य का ढकना,
क्या चूक गए हो रचनाकार
भूतकाल की रचना विज्ञापन
करतेअनचीन्ही झंकार,
समूह में
जब कभी भी
पढ़ता हूँ पूर्व प्रकाशित रचना
रचनाकार का प्रचार-प्रसार लगे
जिसकी सूख गई है कल्पना
बीते कल लिए आज में सजना।
धीरेन्द्र सिंह
23.09.2026
13.21
x
मंगलवार, 22 सितंबर 2026
यह भारत है
बहुबोली, बहुभाषाएँ संग हैं नव आशाएं
धर्म प्रमुख बना दावेदार देश क्या बताए
सोमवार, 21 सितंबर 2026
आपके नाते
मजबूर कर रही हैं आपकी बातें
दिल झुक रहा है आपके नाते
हर पोस्ट आपकी भावना दर्शाती
क्या सोचती जाएं आप है बतलाती
कुछ कल्पना आपकी कुछ बीती बातें
दिल झुक रहा है आपके नाते
मन महक उठता है बहक उगता है
भावनाओं की भूख में चहक चुगता है
आप उभर उठती हैं संभावना बांधे
रविवार, 20 सितंबर 2026
लौटा दिया
मुझे ना बुलाती मुझे ना सुनाती
है दुनिया में अपने दुनिया सजाती
है गुस्सा बहुत देखना नहीं चाहे
लगन है यह मेरी मुझी से छुपाती
शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
ऑनलाइन प्यार
भावनाएं उभरती हैं अभिव्यक्तियां अपरम्पार
श्रृंगार बरसता है जब हो जाता ऑनलाइन प्यार
गुण कोई होता है कर लेता सहज आकर्षित
हर भाव, सुगम भाव चाहने को रहता व्यथित
मिल जाता कोई अनुकूल, उठता भाव गुबार
श्रृंगार बरसता है जब हो जाता ऑनलाइन प्यार
मोबाइल के स्क्रीन पर हर बात लगे रसभीनी
शब्दों के फुहार में मिले सुगंध प्रीति नव चिन्ही
हृदय धड़कता विनय से कहता मीठा लगे दुलार
श्रृंगार बरसता है जब हो जाता ऑनलाइन प्यार
जब चाहें तब चाह उकेरे दिन हो या रात, सबेरे
अभिलाषाएं अनंत हैं क्यों बंदिश में खुद को घेरें
दूरी चाहे कितनी हो मजबूरी का ना रहे बुखार
श्रृंगार बरसता है जब हो जाता ऑनलाइन प्यार।
धीरेन्द्र सिंह
गुरुवार, 17 सितंबर 2026
अपनी छांव
हर व्यक्ति अपनी छांव का गांव है
जहां आसक्ति अभिव्यक्ति का निभाव है
मन की भूमि पर कई नई उगती फसलें
कामनाओं की मंडियों में भाव हैं उजले
बेचने-खरीदने का ही सबका स्वभाव है
जहां आसक्ति अभिव्यक्ति का निभाव है
मस्तिष्क के ट्रैक्टर से काम सब हो रहा
भावना की बदलियों से सब सिंचित हो रहा
समाज की विविधताओं का दबाव है
जहां आसक्ति अभिव्यक्ति का निभाव है
भीड़ की आदत है पर स्वभाव चाह अकेला
स्वयं की तलाश में जीवन का है कई खेला
बढ़ सका व्यक्ति शक्ति उसके ही पांव हैं
जहां आसक्ति अभिव्यक्ति का निभाव है।
धीरेन्द्र सिंह
18.09.2026
07.19
बुधवार, 16 सितंबर 2026
सेवानिवृत्ति
तट पर बैठे सोचें क्या, बढ़िए नाव की ओर
अपनेपन से मिलना है तो चलें गांव की ओर
रविवार, 13 सितंबर 2026
हिंदी दिवस 2026
साकार है ईश्वर है या कि निराकार
हिंदी का सजता है इसीलिए दरबार
शनिवार, 12 सितंबर 2026
आगमन है
आगमन है आपका, आचमन है आपका
सत्य है उभरता फर्क सिर्फ जाप का
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
हे गणेश
हे गणेश
आप अशेष
देश क्या
पूजे विदेश
प्रथम आराध्य नमन
सृष्टि में सुलभ गमन
बुद्धि के प्रणेता
सन्मुख सदा उपस्थिति
फल देते वैसा ही
जैसी जिसकी नियति
गणपति दूर करें वहम
सुमति दृष्टि में रहे सुगम
सृष्टि में विधान है
आप में ज्ञान है
वृष्टि कई भावों की
आप में ही ध्यान है
गजानन को अर्पित सुमन
मनन मुग्धित करे नमन।
धीरेन्द्र सिंह
12.07.2026
07.47
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
मन
कब झांका व्यक्ति दिल से मन के उपवन में
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन में
गुरुवार, 3 सितंबर 2026
कृष्ण
सृजन की वेदना कब समसीतोष्ण है
मनन जीवन का तप हो तो कृष्ण हैं
सोमवार, 31 अगस्त 2026
भावनाएं
आप शब्द हैं अभिव्यक्ति हैं आसक्ति हैं
स्वीकारिए या नकारिये आपकीं मर्जी
दिल भावनाओं का चितेरा है एक आम सा
बुनता है कल्पनाएं सिलता जैसे दर्जी
रविवार, 30 अगस्त 2026
मनुष्य की बात
उपलब्धियों पर मुस्कराहटों के उपहार
परिलब्धियों में टूटा बिखरा, लिया संवार
जो देख रहे वह नहीं अंतिम सत्य है
सूखे से लगते जख्म देते अक्सर चिंघाड़
बुधवार, 26 अगस्त 2026
सत्य अड़ा है
बानगी तो देखिए सत्य अड़ा है
अचंभित है जग कहां पर धड़ा है
मंगलवार, 25 अगस्त 2026
दृष्टि
कामना की याचना है और सृष्टि है
सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है
आप अपनी उलझनों के हैं पहरेदार
दूसरा अपनी समस्याओं का तारणहार
भावनाओं की सतत विभिन्न वृष्टि है
सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है
मोहक, सम्मोहक संवेदक विभेदक
चेतना के चपल चाह विज्ञ सचेतक
अभिलाषाएं पलक पर चंद्र समिष्ट है
सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है
पढ़ना सब वस्तुतः असम्भव ही है
सोमवार, 24 अगस्त 2026
रिश्ते
कुछ छूट गया खुद से कुछ छूट रहा है
जोड़ने को जीवन कोशिश में टूट रहा है
एक व्यक्ति नहीं व्यक्ति रिश्तों का झुंड है
छूटता हृदय नयन से अपनत्व ढूंढ रहा है
रविवार, 23 अगस्त 2026
गीत
गीत ही है जिंदगी गीत ही आधार है
मीत ही है बंदगी मीत ही जग प्यार है
शनिवार, 22 अगस्त 2026
सईयां
सईयां सात जनम नही धाए संग एहि जनम भाए
आज का दिन बस यूं ही बीता खुल नहीं जी पाए
शुक्रवार, 21 अगस्त 2026
प्यार
मन का संतोष है भाव विशेष है निज झंकार
हृदय हर्षाता स्नेह बरसाता हो जाता है प्यार
गुरुवार, 20 अगस्त 2026
अपने
तिलमिलाती जिंदगी संवरने को अति व्यग्र
यही जीवन संघर्ष है युक्तिपूर्ण गति समग्र
बुधवार, 19 अगस्त 2026
जागना है
हर व्यक्ति की आराधना है साधना है
एक ही प्रयास और गहन जागना है
मंगलवार, 18 अगस्त 2026
शब्द
शब्द अपने सदन में एकल पुखराज हैं
भाव अपने गगन में मूक सा सरताज है
अभिव्यक्तियां ही इनको सजाती रहतींभाषा इसीलिए व्यक्तित्व का हमराज है
गढ़ रहा है कथ्य भाषा तथ्य की अभिलाषापढ़ रहा जो वाक्य अर्थ कई मिजाज हैंशब्द तह स्पंदन खींचे, भाव आंखे मीचेशब्द की परिभाषाओं के संदर्भ अंदाज हैं
रंग बदलते ढंग बदलते रूप है अपरिवर्तनीयशब्द अक्षर संयोजन से बनते गजराज हैंपढ़ चुका जो गढ़ चुका वह भी कहीं अपूर्णसंदर्भ गति से शब्दों का संभव यह राज है
सबकी अपनी शैली है भाषा ऐसे फैली हैशब्द चयन भिन्न हैं पर वाक्य के साज हैंकल यही थे शब्द पर भाषा के तेवर और थेजुड़ते इतर शब्द मुड़ते सम्प्रेषण रियाज़ हैं।
धीरेन्द्र सिंह18.08.202620.48
भाव अपने गगन में मूक सा सरताज है
अभिव्यक्तियां ही इनको सजाती रहतीं





