शनिवार, 11 जुलाई 2026

बात लग गई

बातों बातों में न कैसे बोल थाप लग गई
आग लगी रे आग दिल पर बात लग गई




न भाव नियंत्रण ना शब्द नियंत्रण के क्षण
तर्क-कुतर्क से जीत जाने का अबोला प्रण
कड़वाहट भरे आक्रमण की यूँ छाप जग गई
आग लगी रे आग दिल पर बात लग गई

अहं के अलाव में वहम की विभिन्न चिंगारियां
दहन के निभाव में दोहन की कलाबाजियां
चिंगारियों की उछल कूद दुश्वारियां ठग गईं
आग लगी रे आग दिल पर बात लग गई

बौद्धिकता का तराजू कहीं लोकप्रियता कांटा
तोल-मोल, तौल-हौल भांति-भांति सा बांटा
कटाक्ष,व्यंग्य, चुटकियों संग खटास रंग गई
आग लगी रे आग दिल पर बात लग गई।

धीरेन्द्र सिंह
11.07.2026
19.45