गीत ही है जिंदगी गीत ही आधार है
मीत ही है बंदगी मीत ही जग प्यार है
हौसले के फैसले चुनौतियों के वलबले
मीत के गीत उपलब्धियों के सिलसिले
प्रीति की प्रतीति ही बिहँसता संसार है
मीत ही है बंदगी मीत ही जग प्यार है
मन स्पंदित श्वास सुगंधित परिवेश तरंगित
अर्चना की सर्जना में विलगाव है प्रतिबंधित
तार मन के जुड़ गए तो स्वर नए उपहार हैं
मीत ही है बंदगी मीत ही जग प्यार है
कामनाएं घास सी उगती हैं मरती हर दिन
क्या बताएं चाह सजती हैं बिखरती छिन-छिन
एक तृष्णा एक बेचैनी गुप्त निज मनधार है
मीत ही है बंदगी मीत ही जग प्यार है।
धीरेन्द्र सिंह
24.08.2026
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