आप यादों में इस कदर तो आइए
एक चेहरे पर नजर जैसे दौड़ाइए
हर आहट में बेचैनी सी छटपटाहट
कामनाओं में भी होती है घबराहट
स्वप्न बनकर मन को ऐसे भरमाइए
एक चेहरे पर नजर जैसे दौड़ाइए
आप एक याद एक फरियाद युक्त
थाप जीवन की बिन आप उत्सुक
हवा सुगंध मिली जैसे महक जाइए
एक चेहरे पर नजर जैसे दौड़ाइए
कहां भटक गए या मुझे भूल गए
तलवे से हृदय तक शुष्क शूल हुए
इतनी उपेक्षा प्रतीक्षा जैसे न लहराइए
एक चेहरे पर नजर जैसे दौड़ाईए।
धीरेन्द्र सिंह
07.10.2026
06.46