रविवार, 28 जून 2026

मन

किसको कहां मन ढूंढ रहा सब मस्त हैं
यह चिंतन त्रुटि है कि लगे भाग्य अस्त है



विश्लेषण की क्षमता संतुलित हो संयमित
तथ्य उभरता स्पष्ट कर्म तदनुरूप नियमित
स्व से सृष्टि तक नियम पारदर्शी समस्त है
यह चिंतन त्रुटि है कि लगे भाग्य अस्त है







एक समूह के बल पर नवनिर्माण प्रक्रिया
समूह गठन के लिए सर्वहितकारी क्रिया
निजता के जाल में निज हानि जबरदस्त है
यह चिंतन त्रुटि है कि लगे भाग्य अस्त है







इसे न समझें काव्य प्रवचन की नई विधा
उस पीड़ा को समझिए जिसमें मानव बींधा
घर-परिवार अस्तव्यस्त व्यक्ति बाहर मस्त है
यह चिंतन त्रुटि है कि लगे भाग्य मस्त है।

धीरेन्द्र सिंह
29.06.2026
08.35