रविवार, 30 अगस्त 2026

मनुष्य की बात

उपलब्धियों पर मुस्कराहटों के उपहार
परिलब्धियों में टूटा बिखरा, लिया संवार
जो देख रहे वह नहीं अंतिम सत्य है
सूखे से लगते जख्म देते अक्सर चिंघाड़






सब ठीक है कह देना आदत बन गयी
ठीक भी है कहाँ कुछ देख रहा संसार
असफलताएं, विवशताएं हैं खूब सताएं
किस-किस से करे व्यक्ति अच्छा व्यवहार

भौतिक सुख साधनों से खुशियां नापते
हृदय संवेदना की बातें करते बस गंवार
भावशून्यता से प्राप्त कर रहे हैं अपने लक्ष्य
भावनाएं हाशिये पर पाकर अपनों से दुत्कार

बौद्धिकता कौन पूछता "चैट-जीपीटी" तो है
इंटरनेट बना मस्तिष्क संभावनाएं अपार
प्रौद्योगिकी तकनीक ही सच्चा लगता मीत
व्यक्ति खो रहा है व्यक्ति या कारण दुर्व्यवहार।

धीरेन्द्र सिंह
05.58