शुक्रवार, 29 मई 2026

बर्तन

 बर्तन टकराते हैं
जब भी छुआ जाए

टकराना बर्तन स्वभाव है
या कमजोर संयोजन
आजकल इसपर ही उद्बोधन
रसोई जल रही है

बर्तनों का विभाजन
आवश्यकता भी अनिवार्यता भी
प्रायः कहते हैं
कांच के बर्तन, नक्काशीदार बर्तन
टकराते हैं, टूटते हैं
बिखर जाते हैं,
चुभता है यह बिखरना
इन बर्तन रूपी पात्र का,

नई व्यवस्था के अंतर्गत
बनाये जा रहे हैं
मॉड्यूलर किचन, जिसमें
विभाजित है विभिन्न बर्तनों
रसोई उपयोगी वस्तुओं का खाना
रसोई व्यवस्थित हो तो
पकवान लगे रोज खाना,

रसोई में हो रहा है
वास्तु की दृष्टि से सुधार
भारतीय मसालों, घी से
आपूरित रसोई
गाय दुग्ध से कर रही
स्वयं को अन्नपूर्णा
और सुदूर गांव में भी
मॉड्यूलर किचन सी आहट है।

धीरेन्द्र सिंह
30.05.2026
07.34


गुरुवार, 28 मई 2026

क्यों कीजिये

हर भाव में निभाव जतन कीजिये
दहन को वहन आप क्यों कीजिये

कुछ सुन रहे कुछ पढ़ रहे जो मिला
क्या सत्य क्या असत्य लगे अधखिला
परिवर्तन है नर्तन ताल अपनी दीजिए
दहन को वहन आप क्यों कीजिये

कहने को लोग कहते कई दुश्वारियां
धन धान्य हेतु सिंचित हो हर क्यारियां
इतिहास दे रहा संकेत त्यों कीजिये
दहन को वहन आप क्यों कीजिये

संघर्ष का विकास में है अपना काम
वर्तमान सजाने में प्रमुख भी है नाम
शिलालेखों की अशुद्धियां नव कीजिये
दहन को वहन आप क्यों कीजिये।

धीरेन्द्र सिंह
29.05.2026
08.02


रविवार, 24 मई 2026

मचलता प्यार

जीवन एक नैया और यह उम्र है पतवार
एक हाँथ में दायित्व दूजे में मचलता प्यार

नैया में पतवार का है ना कोई भी एतबार
धोखा भी बहुत देता है हथेलियों का प्यार
दायित्व एक है उलझाता-सुलझाता खुमार
एक हाँथ में दायित्व दूजे में मचलता प्यार

मन की सुने कि समाज के विभिन्न विचार
सतर्कता में जीता व्यक्ति भी हो जाता लाचार
प्रवाह है एक जीवन बदलते संतुलन आधार
एक हाँथ में दायित्व दूजे में मचलता प्यार

दायित्व के दहन में मनन सघन सभी करें
निजत्व के भवन में घनन दमन सभी करें
एक प्यार ही है ऊर्जा जिसके रंगढंग हजार
एक हाँथ में दायित्व दूजे में मचलता प्यार।

धीरेन्द्र सिंह
25.05.2026
05.45