जीवन एक नैया और यह उम्र है पतवार
एक हाँथ में दायित्व दूजे में मचलता प्यार
नैया में पतवार का है ना कोई भी एतबार
धोखा भी बहुत देता है हथेलियों का प्यार
दायित्व एक है उलझाता-सुलझाता खुमार
एक हाँथ में दायित्व दूजे में मचलता प्यार
मन की सुने कि समाज के विभिन्न विचार
सतर्कता में जीता व्यक्ति भी हो जाता लाचार
प्रवाह है एक जीवन बदलते संतुलन आधार
एक हाँथ में दायित्व दूजे में मचलता प्यार
दायित्व के दहन में मनन सघन सभी करें
निजत्व के भवन में घनन दमन सभी करें
एक प्यार ही है ऊर्जा जिसके रंगढंग हजार
एक हाँथ में दायित्व दूजे में मचलता प्यार।
धीरेन्द्र सिंह
25.05.2026
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