शनिवार, 21 मार्च 2026

सत्य

 सत्य क्या है सांझ सरल अरुणाई

रात्रि लगे तिमिर किसी को तरुणाई

भाव सहित दृष्टि की बहती सर्जना

जग की विविधता चेतना की परछाईं


महत्व का घनत्व है अपनत्व सघन

गगन का दहन है तपन की रुसवाई

आकर्षण कर घर्षण करता विकर्षण

बदन बहुरंगी अतरंगी द्रवित चतुराई


कामना के पर्व में योजना स्व सर्व

याचना भी रचना करे जैसे पुरवाई

मोह के खोह में देह लगे अति सुबोध

अभिलाषाएं फूट पड़ें वासंती अमराई।


धीरेन्द्र सिंह

22.03.2026

08.12

गोवा

 गोवा

एक संस्कृति

एक सभ्यता

मानवता का

अभिव्यक्ति का

स्वतंत्रता का,


सागत के तट

विशिष्ट पहचान

लिए अपना आसमान

विविध विधान

नए मूल्य विज्ञान

चेतना के,


यहां व्यक्तित्व निर्द्वंद्व

स्वयं को अभिव्यक्त करता

नहीं परतंत्र

यौवन चहुंओर पसरा

भावनाओं का गणतंत्र

स्वयं की सेवा

गोवा,


मदिरा, मैथुन, मनोकामना

कल्पना का यथार्थ सामना

परिधान में परिणय

परिणय में विधान

जीव का सत्य से सामना

उर मेवा

गोवा,


सहज सुविज्ञ बन आइए

स्वयं को स्वयं से छाईए

अंतर्चेतना प्रज्वलित हो

अभिव्यक्त अपने गाइए

आत्मसेवा

गोवा।


धीरेन्द्र सिंह

21.03.2026

21.46