रविवार, 14 जून 2026

क्यों

ऑनलाइन समूह परिचित हो कामना नहीं
मैंने जो लिखा लोग सराहें यह याचना नहीं
क्यों भेजूं मित्र अनुरोध होता इसमें है क्षोभ
रचना है यदि आकर्षक प्रशंसक मांगना नहीं




 

मन कहे वही लिखें भाव का निभाव सींचें
अन्य लेखन स्वभाव से अक्सर सामना नहीं
बुन रहा है जिंदगी को अनवरत अथक मन
भावनाओं के बुनकर को अनर्थक जागना नहीं

छप गया तो क्या हुआ कितनों ने है छुआ
इधर छापो उधर बांटों नहीं लेखकीय साधना
नहीं कागज कलम अभ्यस्त टाइपिंग रखे मस्त
लिख दिया पोस्ट हुआ भाव महके मन आँगना

जब अपरिचित लाइक या करते हैं प्रतिक्रिया
लेखन होता प्रोत्साहित जैसे दधि जामना
झुंड में हुडदंग बस आपसी क्षद्म प्रशंसा तंत्र
साधना एकल है होती जिससे भाव जागना।

धीरेन्द्र सिंह
15.06.2026
07.45