गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

यश-अपयश


यश-अपयश प्रभु हाँथ सबने पढ़ा है
क्या जीबन में सब कुछ ईश गढ़ा ह

व्यक्ति की आसक्तियाँ लांघती भित्तियां
कौन जाने किस गति में कौनसी नीतियां
अनपढ़ भी यज्ञ लगे लिखा-पढ़ा है
क्या जीवन में सब कुछ ईश गढ़ा है

बर्तन सा बज रहे हैं आजकल के परिवार
नर्तन करते भाव कर न पाते ठीक श्रृंगार
सजना-संवरना कृत्रिम में मानव पड़ा है
क्या जीवन में सब कुछ ईश गढ़ा है

प्रारब्ध और कर्म संग धर्म की आपाधापी
हर राह में इध्वर दिव्यलोक की हो मापी
ईश्वरीय परिवेश सृजन में आलोचना अड़ा है
क्या जीवन में सब कुछ ईश गधा है।

धीरेन्द्र सिंह
02.10.2026
05.42

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