आपने कुछ शब्द लिखा भींग गया मन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन
अंदाज आपका कैसे सबसे अलग है लगता
पर्वत से जैसे मद्धम गति बहता हुआ झरना
आप कौन हैं क्या हैं कैसे झंकृत मन आंगन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन
लिखते ही रहतीं आप पोस्ट करते रहती हैं
जंगल में जैसे उन्मुक्त हवा बहते रहती है
भाव झोंके आपके रंग सुंदर करें हैं चमन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन
इस उपवन में मनभाव को मिलता विश्रांति
आप लगन भाव की अधरों की मधुर कांति
एक खयाल आप मेरी कल्पना की दहन
इतनी सुगंध तरलता भरी आप उपवन।
धीरेन्द्र सिंह
30.09.2026
07.22
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