सुंदरता चमकती-दमकती भरमाती है
हृदय मोहित हो कहता वह मेरा साथी है
आकर्षण एक स्वाभाविक प्रक्रिया है
आधा जीवन प्यार कल्पना में जिया है
बस जाता कोई रूप लगे मन में आंधी है
हृदय मोहित हो कहता वह मेरा साथी है
व्यक्ति अपने अनुसार प्यार को है जांचता
कोई रूप अनुरागी कोई विशेषता बांचता
बेहद करना चाहता डरता हद की मुनादी है
हृदय मोहित हो कहता वह मेरा साथी है
जुड़ जाना या जुड़ने का निरंतर करे प्रयास
आकर्षण में भटक व्यक्ति करे प्रेम की तलाश
भावनाओं की निज होली रंगने का मन आदी है
हृदय मोहित हो कहता वह मेरा साथी है।
धीरेन्द्र सिंह
05.11.2026
05.57
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