स्वतंत्रता के तंत्र में यंत्रवत क्यों रहें
जिज्ञासा जहां कहे उसी ओर हम बहें
परतंत्र होना मनुष्य की है असमर्थता
स्वतंत्र रहे जीवन आवश्यक है सतर्कता
मनभाव जो भी हैं निर्द्वंद्व होकर कहें
जिज्ञासा जहां कहे उसी ओर हम बहें
मन को मारकर भी जीना है कोई जीना
मन ऊंचा रख प्रहरी सीमा पर ताने सीना
तिरंगा में लिपटा वीर सुरक्षा सींचते रहें
जिज्ञासा जहां कहे उसी ओर हम बहें
निर्धारित दिशा में बहना प्रगति है उत्थान
हर देश का है आदर पर अपना देश महान
तिरंगा हमारा भाल निरंतर ऊँचा करते रहें
जिज्ञासा जहां कहे उसी ओर हम बहें।
धीरेन्द्र सिंह
15.08.2026
07.02

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