मंगलवार, 11 अगस्त 2026

आहट

हर हथेली पर बिखरी हृदय की अकुलाहट
संशयभरी निरी प्रतीक्षा मनभावन की आहट

जीवन के प्रवाह में तड़पन की मंथर भरी है आह
कुछ पा लिया बिसर गए कुछ नएपन की है चाह
क्या सत्य क्या असत्य परिभाषाओं की सरसराहट
संशयभरी निरी प्रतीक्षा मनभावन की आहट

जीवन थाह मिले अनुभव अथाह खिले की चाहत
कौन जिया पुलकित हिया अनुभव की मर्म आहट
पल को जिया क्षण में हिया सौरभ की अकुलाहट
संशयभरी निरी प्रतीक्षा मनभावन की आहट

हथेलियां खुली हैं पर यह कोईं नहीं पुकार है
हृदय के उमंगों की सुप्त सजी हुई झंकार हैं
क्या मिला क्या मिल न सका इसकी नहीं घबराहट
संशयभरी निरी प्रतीक्षा मनभावन की।आहट।

धीरेन्द्र सिंह
12.08.2026
08.46

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