शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

नाच रे तन नाच

 नाच रे तन नाच मन नाच रहा जैसे
आँच तेज है खुद को आँक रहा कैसे

जिंदगी उत्सवों की बेचैन प्रणाली है
मन सोच रहा क्या खनकती प्याली है
लिखा गया है जो उसे बाँच रहा कैसे
आँच तेज है खुद को आँक रहा कैसे

लेने को लंबित अभी फैसले बहुत हैं
मन क्यों अचंभित सिलसिले बहुत हैं
उम्र की स्लेट पर क्यों हिसाब ऐसे-तैसे
आँच तेज है खुद को आँक रहा कैसे

यह तन ही तो है अनुभूतियों का चितेरा
कामनाओं की धुन पर सरगमों का डेरा
मन ऊर्जा अनंत है खुद को जांच रहा कैसे
आँच तेज है खुद को आँक रहा कैसे।

धीरेन्द्र सिंह
31.10.2026
03.57

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