सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

दशहरा

मर्यादा में जीवन के त्याग दिए कई धुन श्रावण
राम के कष्ट भूल कहते हैं कि जलता है रावण



ज्ञान, ध्यान, उत्थान के ख्यातिप्राप्य अनुरागी
शिव को अपना सिर अर्पण करनेवाला त्यागी
ऐसे योगी की सत्ता के रुग्ण कर दिए सब चाँवड़
राम के कष्ट भूल कहते हैं कि जलता है रावण

दशहरा त्यौहार है या जीवन शैली का अभिसार
दग्ध परीक्षा तन- मन कौशल का परखे श्रृंगार
घर त्यागा, सत्ता भी, पत्नी छली गई निज प्रांगड़
राम के कष्ट भूल कहते हैं कि जलता है रावण

अब भी समाज में राम सरीखे सीता जैसी दृढ़ता
रामायण सा युद्ध निरंतर हो रही पराजित मूढ़ता
हर मन राम-सीता सा अगन-गगन रघुवंश सा प्रण
राम के कष्ट भूल कहते हैं कि जलता है रावण।

धीरेन्द्र सिंह
20.10.2026
06.07


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