शनिवार, 1 अगस्त 2026

सावन

शब्द चुपके आ पहुंचा भावनाओं का बन संवाहक

आप संशय में हैं उलझे समस्या यह उत्पन्न नाहक


बदलती है प्रीत रीत कल्पनाओं से परे अकस्मात
जैसे तपती दोपहरी में हो रिमझीम सावन बरसात।

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