जेन-जी हुजूम जंतर-मंतर परिवर्तनीय ले जिज्ञासा
सुनने वाले हो गए हतप्रभ देखकर इनकी भाषा
प्रजातंत्र में विरोध भी तो है एक मौलिक अधिकार
पर भाषा में शब्द चयन बतलाते हैं व्यक्ति संस्कार
असामाजिक असभ्य शब्द से क्या टूटती निराशा
सुनने वाले हो गए हतप्रभ देखकर इनकी भाषा
वस्त्र की आजादी है अभिव्यक्ति की भी स्वतंत्रता
जेन-जी आप न भूलिए आप भारत देश के नियंता
आप पर निर्भर देश है आप ही हैं सबकी नव आशा
सुनने वाले हो गए हतप्रभ देखकर इनकी भाषा
संयोजन, आयोजन में जेन-जी है अति तेज प्रखर
पर यह क्या लक्ष्य प्राप्ति हेतु अशोभनीय शब्द डगर
भाषा से झुक गयी आशा जेन-जी क्यों की तमाशा
सुनने वाले हो गए हतप्रभ देखकर इनकी भाषा।
धीरेन्द्र सिंह
27.07.2026
08.28
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