मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

परछाई

दिल को इस तरह याद यूँ आपकी आयी
चिंहुक कर चमक उठीं आप मेरी परछाईं

आप बहुमूल्य हैं हृदय कह रहा है निडर
श्राप किसने दिया बाधित हुई प्रेम डगर
जिंदगी तन्मय पर अचानक कैसे भरमाई
चिहुंक कर चमक उठीं आप मेरी परछाईं

यह टूटे प्रेम का भाव नहीं बाधित प्रवाह
सरपट प्रवाह में उभरे कई परिचित डाह
आप लड़खड़ा समझीं अभिव्यक्ति तुरपाई
चिह्यूंक कर चमक उठीं आप मेरी परछाईं

किसी जीवंत व्यक्तित्व को खुद में समेटना
मस्तिष्क समझ रहा दिल में उठ रही वेदना
आप अन्य में मशगूल कैसे चेतना को निभाई
चिंहुक कर चमक उठीं आप मेरी परछाई

पुरुष हूँ दम्भ सुप्तावस्था में भी लगे प्रखर
आप से पहल ना हो तो त्यजन वह डगर
यादों में जब आप आईं भूल गया ठकुराई
चिहुंक कर चमक उठीं आप मेरी परछाईं।

धीरेन्द्र सिंह
29.10.2026
21.07

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