आदिशक्ति वंदना देहभक्ति अभिव्यंजना
शौर्य की सृष्टि है युद्ध मात्र विडंबना
नवरात्र के सभी पात्र विश्व के हैं क्षात्र
शक्ति उद्भवन पल्लवन विजय सुपात्र
भक्ति आराधना से गूंज उठे हर अंगना
शौर्य की सृष्टि है युद्ध मात्र विडंबना
मन कुलषित ले भाव, उल्लसित प्रभाव
ऐसे होते कपटी और धूप पिघलती छांव
मर्दन मात्र विकल्प यदि लेशमात्र समझ ना
शौर्य की सृष्टि है युद्ध मात्र विडंबना
व्रत, उपवास, भक्ति मात्र मन की ना शुद्धि
नीतिकौशल, रणकौशल में भी होती वृद्धि
शक्ति जिसकी उच्च आसक्ति की प्रवंचना
शौर्य की सृष्टि है युद्ध मात्र विडंबना।
धीरेन्द्र सिंह
11.10.2026
03.51