कहां प्यार है
सत्य है, समझ है, तार्किक विचार है
अभिनय की दुनिया में कहां प्यार है
कामनाएं, कुंठाएं, वर्जनाएं ही मुखरित
अर्चनाएं कैसे लुभाएं भ्रम है प्रचलित
छल, मजाक,मस्तियों का यह संसार है
अभिनय की दुनिया में कहां प्यार है
फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम में सक्रिय
भाषा, भाव उनका देख दुखी रहे हिय
कितना नाटकीय हो गया दिल दुलार है
अभिनय की दुनिया में कहां प्यार है
होगी कहीं गूढ़ भावना जनित ऋतुवार
कहीं कोई भाव समझता होगा ऋतुसार
हृदय से हृदय मिले यही सत्य अंकवार है
अभिनय की दुनिया में कहां प्यार है।
धीरेन्द्र सिंह
21,06.2026
22.23
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