भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
"माहेरवाशी" कल्पना का गुणगान करूँगा
समाज भी सरकार है सम्मान करूँगा
श्रीकांत भारतीय, डॉ श्रेया भारतीय की सोच
अखिलेश चौबे, वेदिका संग 214 की फौज
नई सोच अभिनव कर्म प्रसारित जहान करूँगा
समाज भी सरकार है सम्मान करूँगा।
धीरेन्द्र सिंह
10.05.2026
10.05
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