बुधवार, 3 जून 2026

ब्लॉक भ्रम

याद आने के लिए अनुमति जरूरी नहीं

ब्लॉक करके भी क्या ब्लॉक कर पाएंगे
झोंका हवा का जहां चाहे पहुंच जाता है
इस पहुंच से भला कब तक दूर जाएंगे

अपनी करवटों में लिए कुनमुनाती बेचैनियां
अपनी हरकतों में कितना छुपा पाएंगे
छुपाने से भला कब तक छुपा पाया कोई
मुहाने तक पहुंचने को चुपचाप धाएंगे

मन गगन में दहन है अनमन तड़पन कहे
आग मद्धम ना बुझे सुनिए जल जाएंगे
महकती रिमझिम सावन का है आमंत्रण
जो जिए संग वह तरंग रह उमंग जिलाएंगे

ब्लॉक एक भ्रम है क्रम में है यह चलन
किशोर मानसिकता में भाव उलझाएंगे
टूटकर भी जुड़ जाते हैं बादल छंट जाते
अंधियारे जग में कितने जुगनु लुभाएंगे।

धीरेन्द्र सिंह
04.06.2026
12.17





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