ध्येय क्या है लिखने का यह भी विचारिए
फिर अनुभवों को अभिव्यक्ति में निखारिए
अकारण कोई भी अक्सर लिखता नहीं है
शब्दों के सुसज्ज़ा संग जो दिखता यही है
लेखन के आदर्श, सिद्धांत को निथारिए
फिर अनुभवों को अभिव्यक्ति में निखारिए
यह सुझाव नहीं शिक्षा नहीं हिंदी की पीड़ा है
लिखना छपना फिर ना दिखना हिंदी क्रीड़ा है
हिंदी भाषा में निराशा है यह कैसे है उच्चारिए
फिर अनुभवों को अभिव्यक्ति में निखारिए
जहां भी लिखते-लिखती हों वहां पर करें गौर
सभी फलदार वृक्ष वही कोई डाल हो भरे बौर
लेखन माँजिए शब्द साधिए आप तो स्वीकारिए
फिर अनुभवों को अभिव्यक्ति में निखारिए।
धीरेन्द्र सिंह
28.10.2026
16.44
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