शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

रिक्त अंजुल

 मर्यादित जीवन 

बदलता है केंचुल

एक चमकीली आभा खातिर,

इंसानियत का प्यार

रिक्त अंजुल

उलीचता रहता है अख्तियार

बनकर शातिर,

दौड़ने का भ्रम लिए

यह रेंगती जिंदगी।


धीरेन्द्र सिंह


4 टिप्‍पणियां:

  1. अपना अपना नजरिया , ज़िन्दगी को देखने का।

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    1. जी संगीता जी यह नजरिया ही तो है। नजरिया कितनी बातों को समेट लेती है। धन्यवाद।

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  2. जिंदगी जैसे जिओ सब अपने हाथ में हैं

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  3. कविता जी काश जैसे चाहे वैसा जी ले यह ज़िन्दगी। एक सकारात्मक ऊर्जा के लिए धन्यवाद कविता जी।

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