कब झांका व्यक्ति दिल से मन के उपवन में
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन में
सूर्य मात्र ऊर्जा नहीं दर्शाता सभी दिशा है
उपद्रव, उत्पात, उफनती सक्रिय निशा है
दिल है सब समझता पर व्यक्ति करता दमन है
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन है
मन अति विशाल गहरा मात्र झांक सकते हैं
उपवन सुगंधित रंग-बिरंगा माँज सकते हैं
इतना प्राकृतिक वैभव फिर कैसे उभरता दहन है
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन है
मन के उपवन में व्यक्ति जब उन्मुक्त घूमता
नभ की ऊंचाइयों में तब सत्य को चूमता
मन धरा-गगन मन पुलकित चंचल चितवन है
नित्य नया सूर्य उगता करता उजियारा मन है।
धीरेन्द्र सिंह
05.09.2026
07.22
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