रचनाओं को
निरंतर लाइक करना
सम्मान है
रचना और रचनाकार का,
रचनाकार का दायित्व है
लाइक करनेवाले को देना
धन्यवाद
पर कैसे?
लाइक कर्ता के
इनबॉक्स में जाकर
धन्यवाद ज्ञापन
आभार है,
यह प्रणाली
लाइक को नमस्कार है।
धीरेन्द्र सिंह
10.57
08.03.2026
रचनाओं को
निरंतर लाइक करना
सम्मान है
रचना और रचनाकार का,
रचनाकार का दायित्व है
लाइक करनेवाले को देना
धन्यवाद
पर कैसे?
लाइक कर्ता के
इनबॉक्स में जाकर
धन्यवाद ज्ञापन
आभार है,
यह प्रणाली
लाइक को नमस्कार है।
धीरेन्द्र सिंह
10.57
08.03.2026
तलहटी से उभरते झोंके उठे हैं
यादें सोई थीं कुछ छूटे उठे हैं
टिमटिमाती आंखों के प्रकाश पुंज
अवलोकन पर दृश्य सब है धुंध
भावनाओं के पथ जगे अनूठे हैं
यादें सोई थीं कुछ छूटे उठे हैं
अब न कसमसाहट ना बेचैनी
निरख मिले राहत हथौड़ी छैनी
शिल्पकार असफल पड़े टूटे हैं
यादें सोई थीं कुछ छूटे उठे हैं
तलहटी व्यक्तिगत आंतरिक श्रृंगार
यहीं से रुनझुन यही से उठे हुंकार
अपनी पगुराहट संग टूटे खूंटे है
यादें सोई थी कुछ छूटे उठे हैं।
धीरेन्द्र सिंह
14.11
07.03.2026
खुद को तलाशिए बिखरे हुए हैं सब
सुध ना बिसारिए निखरे हुए हैं जब
एक उम्र सबकी है अनुभव लिए हुए
कुछ चिंतित कुछ कहें क्या वह जिए
सबका कहीं अधूरा सा जीवन सबब
सुध ना बिसारिए निखरे हुए हैं जब
विपरीत जिंदगी को भी पड़ता है जीना
कहीं कौड़िया मिले कहीं रंगीन नगीना
हर एक का अंदाज़ हर एक का अदब
सुध ना बिसारिए निखरे हुए हैं जब
कहे आत्मा तो मानिए कि निखर गए
जानेगा कैसे कौन कि क्यों बिखर गए
जीवन को पढ़ते-पड़ते मिले अर्थ गजब
सुध ना बिसारिए निखरे हुए हैं जब।
धीरेन्द्र सिंह
06.03.2026
22.34
आरक्षण, आरक्षण
जिसकी चर्चा प्रतिपल-प्रतिक्षण
सुरक्षित कुछ इसमें
कुछ कर रहे आक्रमण
आरक्षण -आरक्षण
संविधान ने बोली बोली
पहुंची ऊपर सर्वहारा टोली
यह भी प्रगति दौर रहा
अब आर्थिक पिछड़े, बोली गोली
करवट रहा बदल कण-कण
कर्म-धर्म-सत्कर्म कहते अपनी बात
विशिष्ट स्थान संग हो विशेष पहचान
यह कैसा बिहान का प्रण
अपना-अपना सबका रण
आरक्षण, आरक्षण
सीमाएं तोड़ रहा आरक्षण
नए पक्ष माँग रहे आरक्षण
क्रिकेट का खेल लोकप्रिय
खिलाड़ी को रखने का प्रण
आरक्षण-आरक्षण।
धीरेन्द्र सिंह
25.02.2026
10.20
चल भी न सकें साथ लेकर बौद्धिक वफादारी
कैसे सींचते हैं आप सुरभित जिंदगी की क्यारी
एक पहल ही तो है सर्जना जगत के सब कार्य
अभिव्यक्ति सत्य है तो भाषा में ना हो दुश्वारी
हिंदी की प्रस्तुतियों में अंग्रेजी में प्रतिक्रियाएं
अंग्रेजी मोह नहीं तो क्या है हिंदी मोह खुमारी
बौद्धिकता के दो चेहरे भाषा में जो अस्पष्टता
हिंदी क्षरण पर चुप रहना गूंगों की तरफदारी
हिंदी के पोस्ट पर अंग्रेजी में थैंक यू लिखना
हिंदी का अपमान इस जीवंतता की है शुमारी
चावल में कंकड़ सा लगता है इतर भाषा शब्द
भाषा की शुद्धता भी शिक्षितों की जिम्मेदारी
विद्वान वह है असफल जिनमें भाषा मिश्रित
आश्रित होने पर लुट जाती है जमींदारी
मुझसे जुडना है तो भाषा संचेतना है प्रथम
वरना अकेले ठीक हूँ करते हिंदी की तरफदारी।
धीरेन्द्र सिंह
25.02.2026
05.20
रूठने की क्या अदा है समझ नहीं आए
दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं
शब्दों पर हुई चर्चा भाव का हुआ खर्चा
उन्होंने लिख दिया लिखा मैंने भी पर्चा
हिंदी का सिपाही हूँ अंग्रेजी शब्द क्यों आए
दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं
लाइक मेरी रचना को करें तो हैं दिखती
टिप्पणी प्रतिक्रिया ना उनकी तेज थपकी
कहती हैं व्यक्ति विशेष पर लिखा क्यों जाए
दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं
बोलीं कि सबको लिखती अंग्रेजी में लिखा
हिंदी के साधक को अंग्रेजी में लिखा दिखा
मेरे द्वारा अब अंग्रेजी में भाषा शास्त्र कहा जाए
दिखती हैं पर लिखती नहीं, लिखते जाएं
वह श्रेष्ठ हैं विदुषी हैं करता हूँ उनका सम्मान
चिंतन की प्रक्रिया में स्तब्ध हुआ जो आसमान
आप यह ना पूछें कौन आदि शक्ति है बताएं
दिखती है पर लिखती नहीं, लिखते जाएं।
धीरेन्द्र सिंह
24.02.2026
20.08
चेतना हुई चपल चहक उठा है सवेरा
एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा
चित्त बसा चित्र है अभिनव ना विचित्र
भावनाओं की कलियां कल्पना की मित्र
आपका उदय जीवन निर्मल वलय घेरा
एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा
शयनपूर्व मेरी रचनाओं पर दे प्रतिक्रियाएं
भोर चहचहाते शब्द कलरव नित जगाएं
आपका सानिध्य सर्जन सूर्य उदय मुंडेरा
एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा
प्रदत्त आपका यह अलंकार "निपुण चितेरा"
महत्व मेरे लेखन का आपने जो यूँ उकेरा
तन अपरिचित मन हर्षित चर्चाओं का डेरा
एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा।
धीरेन्द्र सिंह
24.02.2026
05.43