चेतना हुई चपल चहक उठा है सवेरा
एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा
चित्त बसा चित्र है अभिनव ना विचित्र
भावनाओं की कलियां कल्पना की मित्र
आपका उदय जीवन निर्मल वलय घेरा
एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा
शयनपूर्व मेरी रचनाओं पर दे प्रतिक्रियाएं
भोर चहचहाते शब्द कलरव नित जगाएं
आपका सानिध्य सर्जन सूर्य उदय मुंडेरा
एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा
प्रदत्त आपका यह अलंकार "निपुण चितेरा"
महत्व मेरे लेखन का आपने जो यूँ उकेरा
तन अपरिचित मन हर्षित चर्चाओं का डेरा
एक जागरण रचा, शब्द निपुण चितेरा।
धीरेन्द्र सिंह
24.02.2026
05.43
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें