मंगलवार, 25 अगस्त 2026

दृष्टि

कामना की याचना है और सृष्टि है
सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है



आप अपनी उलझनों के हैं पहरेदार

दूसरा अपनी समस्याओं का तारणहार

भावनाओं की सतत विभिन्न वृष्टि है

सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है


मोहक, सम्मोहक संवेदक विभेदक

चेतना के चपल चाह विज्ञ सचेतक

अभिलाषाएं पलक पर चंद्र समिष्ट है 

सब पढ़ लिए है क्या ऐसी दृष्टि है


पढ़ना सब वस्तुतः असम्भव ही है

क्या सोचना बुरा यदि पराभव भी है
कर्मों का यह एक स्पष्ट प्रविष्टि है
सब पढ़ लिए हैं क्या ऐसी दृष्टि है।

धीरेन्द्र सिंह
25.08.2026
23.35

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