मन का संतोष है भाव विशेष है निज झंकार
हृदय हर्षाता स्नेह बरसाता हो जाता है प्यार
प्यार के कई विशेषण युगों से हो रहा विश्लेषण
हर रूप में प्यार जरूरी प्यार आवश्यक पोषण
प्यार समर्पण प्यार प्रदाता प्यार नहीं अधिकार
हृदय हर्षाता स्नेह बरसाता हो जाता है प्यार
शिशु की निर्मल मुस्काहट बच्चों की शरारती आहट
किशोरावस्था की अनंत पेंगे युवावस्था की चाहत
हर उम्र में भाव प्यार के झूमे भव्य दिव्य उपहार
हृदय हर्षाता स्नेह बरसाता हो जाता है प्यार
कभी पांव पाजेब पहन छम-छम ध्वनि सुनाए
कभी पलक उठते हुए दृग विद्युत ही बरसाए
कभी शब्दभरी फुलवारी में लहर सुगंध फुहार
हृदय हर्षाता स्नेह बरसाता हो जाता है प्यार।
धीरेन्द्र सिंह
21.08.2026
18.08
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें