तिलमिलाती जिंदगी संवरने को अति व्यग्र
यही जीवन संघर्ष है युक्तिपूर्ण गति समग्र
खींचतान में ढूंढें सब अपना ही आसमान
विश्वास लिए ऐसा जैसे हो मुक्त प्रावधान
प्यार अजेय ऊर्जा संग हो जाते हैं अभद्र
यही जीवन संघर्ष है युक्तिपूर्ण गति समग्र
अपनों के समूह में रचते अपने चक्रव्यूह
सपनों के समूह में अपने जाते अक्सर दूह
अपनापन डरा रहा मुस्कराहट छिपे भद्र
यही जीवन संघर्ष है युक्तिपूर्ण गति समग्र
जीवन प्रतियोगिता भरी साथ में है दृढ़ अहं
मैं बड़ा हूँ, श्रेष्ठ हूँ मैं जीवन में कहीं ना दोयम
थोथा चना बाजे घना सा सब ओर चाहें कद्र
यही जीवन संघर्ष है युक्तिपूर्ण गति समग्र।
धीरेन्द्र सिंह
20.08.2026
21.11

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