आप मुझसे हर समय गीत का वादा करें
प्रणय पाहुन सा नित रोज ही मिलता रहे
हृदय आकुल हृदय व्याकुल को ही चाहे
भावनाएं कामनाएं योजनाएं सरसता रहे
हृदय संतुलन के लिए हृदय का आकलन
संगत हृदय जहां मिला संचय चलता रहे
मांग सकता नहीं प्रणय रण का चितेरा कभी
ताक-झांक सफलता का मन में खिलता रहे
कल्पनाएं संभावनाओं की निज पटरानी है
अलग क्या कह रहा यह दिलों में ढलता है
जीवंतता जिसमें रहे उनमें ही ऐसे भाव बहें
अन्य सुप्त जीते रहते जीवंत जलते रहता है
आपका सरगम अनोखा झंकृत बिन मुखौटा
शब्द लिपटे धुन, शब्द तान लिए ढलता है
प्रणय पंखुरी पल्लवन क्रिया आप में भी है
पोस्ट आपका प्रायः इसीलिए दमकता है।
धीरेन्द्र सिंह
15.08.2026
17.11

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