रविवार, 9 अगस्त 2026

किस समाज की यह अवहेलना है
समाज से समाज को क्यों खेलना है
तख्तियों पर लिख गए हैं भाव कई
विचार से विचारों को लगे ठेलना है






धूप तपती दहकती बह रही है कहीं

चाँदनी का धर्म क्या हरदम बहकना है

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