भावनाओं के पुष्पों से, हर मन है सिजता अभिव्यक्ति की डोर पर, हर मन है निजता शब्दों की अमराई में, भावों की तरूणाई है दिल की लिखी रूबाई में,एक तड़पन है निज़ता।
भटक रही नव पीढ़ी नए विचारों का ले अम्बार
उक्तियों की सूक्तियाँ हैं पथप्रदर्शक अपरम्पार
सुधारना, संवारना नया प्रचलित यह कारोबार
प्रतिभा स्वयं निखरती पथप्रदर्शक
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