कैसे कहें उनसे अपनी निजी अभ्यर्थना
शब्द रहित, दग्ध रहित उनकी शक्ति अर्चना
हृदय के स्पंदनों को छूकर हवा से बह गए
आप भी समझे ना समझे क्या वह कह गए
सबकी अपनी-अपनी दुनिया अपनी है सर्जना
शब्द रहित, दग्ध रहित उनकी शक्ति अर्चना
प्यार की जब बात कहें बोले ईश्वर से प्यार
संसार यह भ्रमजाल है मुक्ति इसका द्वार
मानवीय प्रणय खड़ा आत्म देह की गर्जना
शब्द रहित, दग्ध रहित उनकी शक्ति अर्चना
सत्य है कि सर्व परमऊर्जा के अंश हैं
प्रणय कहां निषेध धर्म में यह दंश है
समर्पण परमात्मा का आत्मा की ना दर्शना
शब्द रहित, दग्ध रहित उनकी शक्ति अर्चना।
धीरेन्द्र सिंह
26.06. 2026
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